सऊदी ने ईरान को दिया धोखा, मोहम्मद बिन सलमान ने बार-बार ट्रंप को किया फोन,  खामेनेई देते रहे इस्लाम की दुहाई

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने ईरान को लेकर दोहरा चेहरा अपना रखा था। एक तरफ वो सार्वजनिक तौर पर ईरान के पक्ष में बयान दे रहे थे जबकि अंदर से वो हमला करने के लिए लॉबिंग कर रहे थे।

Mar 1, 2026 - 13:51
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सऊदी ने ईरान को दिया धोखा, मोहम्मद बिन सलमान ने बार-बार ट्रंप को किया फोन,  खामेनेई देते रहे इस्लाम की दुहाई

तेहरान/रियाद/वॉशिंगटन। ईरान के सुप्रीम लीडर जब तक जिंदा थे वो इस्लाम के नाम पर मुस्लिम देशों को एकजुट करने की कोशिश करते रहे। लेकिन अमेरिका के हमले के बाद खुलासा हुआ है कि वो सऊदी अरब है, जिसने डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान पर हमला करने का दबाव बनाया था। वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया है कि सऊदी अरब के प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप को कई बार फोन किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर हमला करने का फैसला तब लिया, जब मोहम्मद बिन सलमान ने उनसे बार बार ईरान पर हमला करने के लिए लॉबिंग की थी।

अमेरिकी अखबार ने इस मामले से वाकिफ चार लोगों का हवाला देते हुए बताया है कि "सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले महीने ट्रंप को कई प्राइवेट फोन कॉल किए थे। इस दौरान उन्होंने बार बार डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला करने के लिए कहा था।" अखबार ने बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप कोई डिप्लोमेटिक समाधान निकालना चाहते थे लेकिन मोहम्मद बिन सलमान हमले पर जोर दे रहे थे। इसके अलावा इजरायल पहले से ही ईरान पर हमला करने के लिए दबाव बना रहा था। यानि, नेतन्याहू के अलावा मोहम्मद सलमान ने भी ट्रंप पर प्रेशर बनाया था।

रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने ईरान को लेकर दोहरा चेहरा अपना रखा था। एक तरफ वो सार्वजनिक तौर पर ईरान के पक्ष में बयान दे रहे थे जबकि अंदर से वो हमला करने के लिए लॉबिंग कर रहे थे। सार्वजनिक रूप से सऊदी अरब शांति और कूटनीति की बात कर रहा था लेकिन पर्दे के पीछे एमबीएस ने ट्रंप को भरोसा दिलाया कि ईरान को सिर्फ और सिर्फ सैन्य ताकत से ही रोका जा सकता है। उन्होंने ट्रंप से ये भी कहा था कि अगर अमेरिका ने हमला नहीं किया तो ईरान और ज्यादा ताकतवर हो जाएगा। इसके अलावा सऊदी अरब ने अमेरिका को आश्वासन दिया कि यदि ईरान जवाबी हमला करता है तो सऊदी अरब तेल की आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को संभालने में मदद करेगा।

मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के साथ अपने करीबी रिश्तों का इस्तेमाल कर वाइट हाउस के भीतर अपनी बात को मजबूती से रखा। आपको बता दें कि ईरान और सऊदी अरब के रिश्ते काफी खराब रहे हैं। लेकिन पिछले 2-3 सालों से ईरान और सऊदी करीब आ चुके थे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के बीच सुलह करवा दी थी। लेकिन पर्दे के पीछे सऊदी अरब इजरायल के साथ मिला हुआ था इसका पता अब चला है। अमेरिकी ऑपरेशन का मुख्य मकसद सिर्फ सैन्य ठिकानों को तबाह करना नहीं बल्कि सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को खत्म करना था। इजरायली हमले में खामेनेई मारे भी गये हैं।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन था कि ईरान से अमेरिका को तत्काल कोई खतरा नहीं था। फिर भी डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दोनों सहयोगियों (इजरायल-सऊदी) के दबाव में हमले का फैसला लिया। ट्रंप प्रशासन ने इस सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया है जिसका मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन करना है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आश्वासन दिया कि यह हमला इराक युद्ध की तरह सालों नहीं चलेगा और अमेरिका किसी दलदल में नहीं फंसेगा।