फर्जी दस्तावेजों के जाल में फंसे सपा नेता आजम खान और बेटे अब्दुल्ला आजम की सात-सात साल की सजा बरकरार, सेशन कोर्ट से अपील खारिज

रामपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा कद रखने वाले समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री आजम खां तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां को पैन कार्ड फर्जीवाड़ा मामले में सात-सात साल की सजा बरकरार रखी गई है। रामपुर की सेशन कोर्ट ने एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले को कायम रखते हुए दोनों की अपील खारिज कर दी। यह मामला फर्जी दस्तावेजों के जरिए अलग-अलग जन्मतिथि पर पैन कार्ड बनवाने से जुड़ा हुआ है।

Apr 20, 2026 - 19:25
 0
फर्जी दस्तावेजों के जाल में फंसे सपा नेता आजम खान और बेटे अब्दुल्ला आजम की सात-सात साल की सजा बरकरार, सेशन कोर्ट से अपील खारिज
आजम खां और अब्दुल्ला आजम की फाइल फोटो।

शिकायत से सजा तक का पूरा घटनाक्रम

यह पूरा मामला वर्ष 2019 में सामने आया, जब भाजपा नेता और रामपुर नगर के तत्कालीन विधायक आकाश सक्सेना ने कोतवाली सिविल लाइंस में शिकायत दर्ज कराई। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने नियमों का उल्लंघन करते हुए दो अलग-अलग जन्मतिथि के आधार पर पैन कार्ड बनवाए हैं। जांच के दौरान इसमें आजम खान की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद दोनों को आरोपी बनाया गया।

फर्जी जन्मतिथि का खेल

जांच में सामने आया कि अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड बनवाए। एक में जन्मतिथि 01 जनवरी 1993 दर्ज है जबकि दूसरे में जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 है। आरोप यह भी लगा कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर ये दस्तावेज तैयार कराए गए, ताकि अब्दुल्ला आजम के विधान सभा चुनाव लड़ने की उम्र की बाधा को पार किया जा सके।

लंबी सुनवाई के बाद 17 नवंबर 2025 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इस फैसले के बाद से दोनों जिला जेल में बंद हैं।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दायर की गई, लेकिन सेशन कोर्ट ने 20 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए दोनों की अपील खारिज कर दी।

अदालत में क्या हुई बहस

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने दलीलें पेश कीं, जबकि अभियोजन पक्ष से एडीजीसी सीमा राणा और अपर महाधिवक्ता ने सरकार का पक्ष रखा। दोनों पक्षों की बहस 6 अप्रैल 2026 को पूरी हो गई थी, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था।

चुनाव और फर्जी दस्तावेज का कनेक्शन

मामले की जड़ 2017 के विधानसभा चुनाव से जुड़ी बताई जाती है। उस समय अब्दुल्ला आजम स्वार सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उनकी उम्र कम थी। आरोप है कि इसी वजह से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर दस्तावेज तैयार किए गए। अब्दुल्ला आजम स्वार सीट से चुनाव लड़े। चुनाव जीतने के बाद यह मामला उठा और जांच में उम्र संबंधी गड़बड़ी सामने आने पर उनका निर्वाचन रद्द कर दिया गया था।

परिवार भी आया जांच के घेरे में

इस पूरे प्रकरण में आजम खान के साथ उनकी पत्नी तंजीन फातिमा का नाम भी सामने आया और उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

बाद के वर्षों में भी अब्दुल्ला आजम कानूनी मामलों में उलझे रहे। 2022 में अब्दुल्ला आजम फिर से चुनाव जीतने में कामयाब रहे, लेकिन एक अन्य मामले में तीन साल से अधिक की सजा होने पर उनकी विधान सभा की सदस्यता दोबारा रद्द हो गई थी।

SP_Singh AURGURU Editor