पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी होंगे बांग्लादेश में उच्चायुक्त, बंगाल की सांस्कृतिक पहलुओं की है खास जानकारी, कूटनीति के भी हैं जानकार
तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त बनाने का फैसला किया गया है। समझा जाता है कि यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे अनुभव के चलते उन्हें बांग्लादेश की जमीनी हकीकत, सांस्कृतिक जुड़ाव और सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता की गहरी समझ है।
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के बैरकपुर से पूर्व टीएमसी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया गया है। सरकार के इस फैसले पर चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल से लंबे समय तक जुड़े रहने के कारण उन्हें बांग्लादेश की सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों की गहरी समझ है। यही अनुभव द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करने, व्यापार, कनेक्टिविटी और कूटनीतिक तालमेल को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
दूसरी ओर भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिहाज से भी यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीमा पार घुसपैठ, तस्करी और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में एक अनुभवी और क्षेत्र की समझ रखने वाला चेहरा प्रभावी भूमिका निभा सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।
यूपीए (युनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस) दौर में दिनेश त्रिवेदी ने रेल मंत्री के अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई। वर्ष 2012 में रेल बजट में यात्री किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। इस फैसले का ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध किया और आखिरकार त्रिवेदी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में टीएमसी के कोटे से मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनाया गया था।
दिनेश त्रिवेदी ने 12 फरवरी 2021 को टीएमसी से इस्तीफा दिया और अगले महीने 6 मार्च 2021 को बीजेपी का दामन थाम लिया था। त्रिवेदी पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से 2009 से 2019 तक सांसद रहे। इसके अलावा, वे 1990-96 और 2002-08 के दौरान राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। 75 पार त्रिवेदी काफी अनुभवी राजनेता रहे हैं। त्रिवेदी करियर डिप्लोमैट प्रणय वर्मा की जगह लेंगे।
त्रिवेदी की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और बांग्लादेश मोहम्मद यूनुस प्रकरण के बाद अपने संबंधों को सुधारने के प्रयास में लगे हुए हैं। दोनों देशों के संबंध तब खराब हुए थे, जब देशभर में चले आंदोलन के बाद तख्तापलट हुआ और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था। अमेरिका समर्थित यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तल्खी स्पष्ट तौर पर दिखी थी। हाल ही में बांग्लादेश में संसदीय चुनाव हुए जिसमें बीएनपी के तारिक रहमान प्रधानमंत्री चुने गए। उनके आने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार के संकेत साफ दिखे हैं।