बांग्लादेश सुरक्षित लौट सकती हैं शेख हसीना,   मौत की सजा पर रोक संभव, भारत-अमेरिका में कूटनीतिक सहमति का दावा किया गया  

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी को लेकर भारत और अमेरिका के बीच सहमति बन गई है। दोनों देश शेख हसीना की सुरक्षित बांग्लादेश वापसी और उनकी फांसी की सजा को टालने के लिए बांग्लादेश पर दबाव बना रहे हैं। शेख हसीना दिसंबर 2026 में बांग्लादेश वापस लौट सकती हैं।

Aug 13, 2026 - 19:03
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बांग्लादेश सुरक्षित लौट सकती हैं शेख हसीना,   मौत की सजा पर रोक संभव, भारत-अमेरिका में कूटनीतिक सहमति का दावा किया गया  


 
ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना दिसंबर में अपने देश वापस लौटने को तैयार हैं। इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और अमेरिका के बीच शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी को लेकर एक कूटनीतिक सहमति बनी है। इसमें उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी मौत की सज़ा व अन्य सज़ाओं पर कम से कम एक साल के लिए रोक लगाने की बात शामिल है। यह जानकारी नॉर्थ ईस्ट न्यूज ने बांग्लादेश के कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से दी है। हालांकि, इसे लेकर भारत या अमेरिका की ओर से अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में अमेरिका और भारत के अधिकारियों ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान समेत शीर्ष अधिकारियों को इस सहमति के बारे में जानकारी दी है। इसके साथ ही इन दोनों देशों ने बांग्लादेश से सहयोग भी मांगा है। रिपोर्ट के अनुसार, हसीना की वापसी के लिए एक संभावित रूपरेखा पर 10 और 11 अगस्त को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और दक्षिण व मध्य एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर के बीच हुई बैठकों के साथ-साथ अन्य कूटनीतिक संपर्कों के जरिए चर्चा की गई थी।  

इसमें बताया गया है कि इस बातचीत का मकसद एक ऐसा फॉर्मूला खोजना रहा है जिसके तहत शेख हसीना को पूर्व प्रधानमंत्री का रुतबा हासिल हो और साथ में सुरक्षा भी बनी रहे। इसके साथ ही उनकी बांग्लादेश वापसी भी आसान हो सके। हालांकि, अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर लगी रोक को हटाने का मुद्दा अभी तक हल नहीं हो सका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को "भारत की नजर से" देखना शुरू कर दिया है। इसमें यह भी दावा किया गया है कि वाशिंगटन और नई दिल्ली की कूटनीतिक मध्यस्थता ने सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और प्रतिबंधित अवामी लीग को सुलह की प्रक्रिया में शामिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका ने बांग्लादेश में "अलोकतांत्रिक" ताकतों की मौजूदगी को अपनी व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति के लिए संभावित खतरे के तौर पर पहचाना है।