इसे दुर्भाग्य कहें या उदासीनता? आगरा के लिए मंजूर स्पोर्ट्स कॊलेज के लिए जमीन नहीं मिल रही और इंटरनेशनल स्टेडियम के लिए जमीन की उपलब्धता है पर सरकार की स्वीकृति नहीं मिल रही

इसे ताजनगरी आगरा का दुर्भाग्य कहें या फिर व्यवस्था की उदासीनता, जहां एक ओर पिछले बीसियों वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की मांग फाइलों में उलझी हुई है, वहीं दूसरी ओर जिस स्पोर्ट्स कॉलेज को शासन स्तर से मंजूरी मिल चुकी है, उसके लिए भी जमीन नहीं मिल पा रही है। खेलों के नाम पर आगरा आज भी उम्मीद और हताशा के बीच झूलता दिखाई दे रहा है।

Dec 20, 2025 - 12:35
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इसे दुर्भाग्य कहें या उदासीनता? आगरा के लिए मंजूर स्पोर्ट्स कॊलेज के लिए जमीन नहीं मिल रही और इंटरनेशनल स्टेडियम के लिए जमीन की उपलब्धता है पर सरकार की स्वीकृति नहीं मिल रही
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बीस साल से दौड़ रही फाइल, नतीजा आज भी शून्य

आगरा जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का सपना कोई नया नहीं है। पिछले दो दशकों से लगातार प्रस्ताव बनते रहे, बैठकें हुईं, सर्वे हुए, लेकिन हर बार एक ही अड़चन सामने आई, शहर में जमीन उपलब्ध नहीं। नतीजा यह कि अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की फाइल आगे बढ़ ही नहीं सकी और खिलाड़ी केवल आश्वासनों के सहारे रह गए।

अब फिर उम्मीद जगी, लेकिन सवाल बरकरार

वर्तमान मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह इस दिशा में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए प्रयासरत हैं। उन्होंने आगरा विकास प्राधिकरण से जमीन के लिए सैद्धांतिक सहमति भी बनवाई है और लखनऊ स्तर पर संपर्क साधा है। उनका तर्क साफ है कि ताजनगरी एक अंतरराष्ट्रीय नगरी है और यहां यदि स्टेडियम बनता है तो विदेशी खिलाड़ी ताजमहल देखने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए भी यहां आएंगे। फिर भी सवाल यही है कि क्या ये प्रयास भी पूर्व की तरह फाइलों में सिमट कर रह जाएंगे?

सेवानिवृत्ति से पहले आगरा को देना चाहते हैं बड़ी सौगात

मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह पहले वर्ष 2000 से पूर्व आगरा में एसडीएम सदर रह चुके हैं और जनवरी 2026 में उनकी सेवानिवृत्ति भी आगरा से ही प्रस्तावित है। इसी वजह से वे चाहते हैं कि अपने कार्यकाल की समाप्ति से पहले आगरा को अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम जैसी ऐतिहासिक सौगात मिल जाए।

स्पोर्ट्स कॉलेज: मंजूरी है, लेकिन रुचि नहीं

हैरानी की बात यह है कि आगरा के लिए स्पोर्ट्स कॉलेज को शासन ने मंजूरी दे दी है, लेकिन जिला स्तर पर उसे लेकर खास उत्साह नहीं दिख रहा। कॉलेज के लिए करीब 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसे देने के लिए न तो शहर प्रशासन तैयार है और न ही अब तक कोई ठोस विकल्प सामने आया है। मजबूरी में देहात क्षेत्रों और मंडल के अन्य जिलों मथुरा, फिरोजाबाद व मैनपुरी में जमीन तलाशी जा रही है। माना जा रहा है कि यदि आगरा में भूमि नहीं मिली तो यह स्पोर्ट्स कॉलेज किसी अन्य जिले के हिस्से चला जाएगा।

पहले भी हुए प्रयास, हर बार निराशा हाथ लगी

पूर्व मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी के कार्यकाल में अजीतनगर गेट–खेरिया मोड़ क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के लिए गंभीर पहल हुई थी, लेकिन मामला न्यायालय में फंसने के बाद सब ठप हो गया। इससे पहले खंदारी में आगरा विश्वविद्यालय की भूमि पर अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव भी असहमति की भेंट चढ़ गया। आज स्थिति यह है कि एकलव्य स्टेडियम जैसे छोटे मैदानों में ही काम चलाया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से काफी दूर हैं।

खिलाड़ियों के सपनों पर भारी सिस्टम

आगरा में प्रतिभा की कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ संसाधनों और इच्छाशक्ति की। जब अंतरराष्ट्रीय नगरी में खिलाड़ियों को बुनियादी ढांचा ही न मिले, तो उनके सपनों को उड़ान कैसे मिलेगी, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।

SP_Singh AURGURU Editor