यूपी कांग्रेस में बड़े बदलाव की आहट, प्रभारी बदले, अब अजय राय की भी हो सकती है छुट्टी

कांग्रेस ने अविनाश पांडेय को हटाकर राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का नया प्रभारी बनाया। अब प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की भी विदाई की चर्चा तेज, OBC या मुस्लिम नेता को जिम्मेदारी मिल सकती है। सांसद इमरान मसूद और राकेश राठौर के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस जातीय और सामाजिक समीकरण साधने में जुटी है। मायावती से मुलाकात विवाद के बाद भी राजेंद्र पाल गौतम को बड़ी जिम्मेदारी मिलने के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

Jun 26, 2026 - 21:35
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यूपी कांग्रेस में बड़े बदलाव की आहट, प्रभारी बदले, अब अजय राय की भी हो सकती है छुट्टी
कांग्रेस के नए प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र पाल गौतम।

2027 के चुनाव से पहले सोशल इंजीनियरिंग पर कांग्रेस का बड़ा दांव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलावों का दौर शुरू हो गया है। पार्टी हाईकमान ने राज्य के प्रभारी अविनाश पांडेय को हटाकर वरिष्ठ दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को नई जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले के साथ ही अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की कुर्सी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पार्टी सूत्रों का दावा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस जल्द ही उत्तर प्रदेश में नया प्रदेश अध्यक्ष भी नियुक्त कर सकती है।

जातीय समीकरण साधने की रणनीति

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों की भी लड़ाई होगी। लोकसभा चुनाव में संविधान बचाओ, पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों पर मिले सकारात्मक राजनीतिक संकेतों के बाद पार्टी अब उसी रणनीति को संगठन में भी उतारना चाहती है।
अभी तक उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के दोनों शीर्ष पद प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रभारी अविनाश पांडेय सवर्ण नेताओं के पास थे। पार्टी का आकलन है कि यह व्यवस्था राहुल गांधी की 'जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' की राजनीतिक लाइन से पूरी तरह मेल नहीं खाती। इसी कारण पहले प्रभारी बदला गया और अब प्रदेश अध्यक्ष के पद पर भी सामाजिक संतुलन बनाने की तैयारी चल रही है।

ओबीसी या मुस्लिम चेहरे पर नजर

सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दो नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं। इमरान मसूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से सांसद हैं और मुस्लिम समाज के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। यदि उन्हें कमान मिलती है तो कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने का संदेश दे सकती है। दूसरी ओर राकेश राठौर, सीतापुर से सांसद हैं और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की स्थिति में कांग्रेस पिछड़ा वर्ग की राजनीति और जातिगत जनगणना के मुद्दे को और मजबूती से आगे बढ़ा सकती है।

बताया जाता है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस सांसदों ने दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर इन्हीं दोनों नेताओं में से किसी एक को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का सुझाव दिया था। इधर अजय राय का कार्यकाल भी पूरा होने वाला है। अजय राय को 17 अगस्त 2023 को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। अगस्त 2026 में उनका कार्यकाल तीन वर्ष पूरा कर लेगा। संगठन में उनकी सक्रियता और वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के कारण उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ा है। 

हालांकि, पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि भूमिहार समाज से आने वाले अजय राय की सामाजिक पहुंच सीमित है और यह वर्ग पारंपरिक रूप से भाजपा का समर्थक माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस 2027 की चुनावी रणनीति के तहत व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

मायावती से मुलाकात बनी थी चर्चा का विषय

राजेंद्र पाल गौतम का नाम इस साल 19 मई को उस समय सुर्खियों में आया था, जब वे बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया के साथ अचानक बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके आवास पहुंच गए थे। बिना पूर्व निर्धारित समय के पहुंचने पर उन्हें मुलाकात नहीं मिल सकी और दोनों नेताओं को वापस लौटना पड़ा। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थीं।

इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के बजाय बसपा के साथ संभावित राजनीतिक समीकरण तलाश रही है। हालांकि बाद में कांग्रेस ने इसे नेताओं का व्यक्तिगत कार्यक्रम बताया और डैमेज कंट्रोल किया। राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि वे मायावती का हालचाल जानने गए थे, जबकि तनुज पुनिया ने इसे सामान्य शिष्टाचार मुलाकात बताया था।

दलित नेतृत्व के जरिए नया संदेश

राजेंद्र पाल गौतम को यूपी प्रभारी बनाए जाने को कांग्रेस केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी पेश कर रही है। पार्टी का लक्ष्य दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रदेश संगठन में भी इसी सामाजिक संतुलन के आधार पर कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को पूरी तरह नए सामाजिक समीकरणों के अनुरूप ढालने की तैयारी में जुट गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी आखिर किस चेहरे को सौंपी जाती है।