धर्मांतरण का ‘स्लीपर सेल’ मॉडल: अब्दुल रहमान ने खोला इस्लामीकरण सिंडिकेट का पूरा राज
आगरा। धर्मांतरण गैंग के दिल्ली से पकड़े गये सरगना अब्दुल रहमान ने आगरा पुलिस की पूछताछ में कबूल किया है कि वह वर्षों से एक स्लीपर सेल मॉडल पर धर्मांतरण का नेटवर्क चला रहा था। उसका तरीका बेहद संगठित और छिपा हुआ था, जिससे वह कानून की नजर से बचता रहा। उसका मकसद कम उम्र के लड़के-लड़कियों को मानसिक रूप से कमजोर करना और फिर उन्हें इस्लाम धर्म में परिवर्तित करना होता था।
टारगेट करता था नाबालिग लड़के-लड़कियों को, फिर लगाता था 'ब्रेनवाश टीम'
पूछताछ में रहमान ने बताया कि वह शुरू में ऐसे नाबालिग लड़के और लड़कियों को टारगेट करता था जो भावनात्मक या सामाजिक रूप से असुरक्षित होते थे। इसके बाद वह अपने मुस्लिम युवकों और युवतियों को उनके पीछे लगा देता था, जो लगातार संवाद और दोस्ती के जरिए उनका ब्रेनवॉश करते थे।
बालिग होते ही कलमा पढ़वाकर निकाह और धर्मांतरण
रहमान ने कबूला कि जैसे ही शिकार युवक-युवतियां बालिग होते, उन्हें मस्जिद ले जाकर कलमा पढ़वाया जाता और फिर एक कन्वर्टेड मुस्लिम के साथ उनका निकाह कराया जाता। उसके बाद आधिकारिक रूप से धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी होती थी।
पूरी टीम थी सिंडिकेट में शामिल, मौलाना कलीम की किताबों से करता था ब्रेनवॉश
रहमान ने खुलासा किया कि वह अकेला नहीं था, बल्कि उसके साथ एक पूरी टीम काम करती थी। ब्रेनवॉशिंग के लिए वह मौलाना कलीम सिद्दीकी की किताबों का सहारा लेता था। ये किताबें उसके घर से बरामद की गई हैं। इसके साथ ही कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया बना था मुख्य हथियार
अब्दुल रहमान ने स्वीकार किया कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से नए युवाओं को टारगेट करता था। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर भावनात्मक जुड़ाव और बहकावे के जरिए युवाओं को अपने जाल में फंसाता था।
और भी स्लीपर सेल्स की तलाश में पुलिस, देशव्यापी रैकेट का अंदेशा
रहमान के खुलासों के बाद आगरा पुलिस धर्मांतरण सिंडिकेट में शामिल अन्य स्लीपर एजेंट्स की तलाश में जुट गई है। इस नेटवर्क के तार अन्य जिलों और संभवतः अन्य राज्यों तक फैले हो सकते हैं। एटीएस और एसटीएफ तथा खुफिया एजेंसियों को भी इस दिशा में सक्रिय किया गया है।