आगरा में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सपा महानगर अध्य़क्ष शब्बीर अब्बास का प्रशासन पर तीखा हमला- लोकतंत्र की हत्या की जा रही
आगरा। समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास ने आगरा जनपद की मतदाता सूची में सामने आई गंभीर अनियमितताओं को लेकर प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हजारों नहीं बल्कि लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार है और यह सीधे-सीधे संविधान की भावना के विरुद्ध है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए मताधिकार का अपमान है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए शब्बीर अब्बास ने बताया कि ड्रॉफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के समय प्रशासन की ओर से जो आंकड़े सामने रखे गए थे, उनके अनुसार UNMAP श्रेणी में 3,25,405 मतदाता यानी 9.04 प्रतिशत और डिस्क्रेपेंसी के नाम पर करीब 1,50,041 मतदाता यानी 4.17 प्रतिशत को नोटिस दिया जाना था। लेकिन अब प्रशासन यह कह रहा है कि कुल 7,64,987 नोटिस जारी किए जाने हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यह बढ़ी हुई संख्या अचानक कहां से आ गई और इसके पीछे की वास्तविक वजह क्या है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने 4 जनवरी को ही जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर बूथवार UNMAP और डिस्क्रेपेंसी का पूरा डाटा मांगा था, लेकिन अब तक वह डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस देरी और चुप्पी से पूरे मामले में संदेह और आशंका की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शब्बीर अब्बास ने आरोप लगाया कि अब फर्जी फॉर्म-7 के माध्यम से वोट कटवाने का षड्यंत्र भी सामने आया है। उन्होंने बताया कि इस गंभीर मामले की न्यायिक जांच की मांग समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा भी की जा चुकी है, वहीं आगरा की एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित डाटा के साथ ज्ञापन सौंपकर इस गड़बड़ी की ओर ध्यान दिलाया है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान अनुच्छेद 326 के तहत प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार देता है। किसी भी नागरिक का नाम बिना उचित सुनवाई और पारदर्शी प्रक्रिया के काटना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह संविधान की आत्मा पर सीधा प्रहार है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश करार दिया।
शब्बीर अब्बास ने यह भी बताया कि दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि 06 फरवरी 2026 तय की गई है, जबकि 28 जनवरी 2026 तक केवल 1,47,797 नोटिस ही मतदाताओं को प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नोटिस और इतना कम समय यह दर्शाता है कि दावा-आपत्ति की प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और आम मतदाता को अपनी बात रखने का वास्तविक अवसर नहीं दिया गया।
उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि जिन मतदाताओं को नोटिस दिए जाने हैं, उनकी पूरक बूथवार सूची तुरंत जारी की जाए, बिना सुनवाई किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फर्जी फॉर्म-7 के जरिए किसी का भी वोट न काटा जाए। SIR प्रक्रिया के तहत जिन मतदाताओं ने अपने मोबाइल नंबर निर्वाचन आयोग को दिए हैं, उनका नाम हटाने से पहले कॉल और एसएमएस के माध्यम से सूचना देना अनिवार्य किया जाए।
शब्बीर अब्बास ने चेतावनी दी कि यदि मताधिकार से वंचित किए गए नागरिकों को न्याय नहीं मिला, तो समाजवादी पार्टी संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहते हुए आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।