भारत-रूस संबंधों पर बोले विदेश मंत्री जयशंकर, हमारे सहयोग ने वैश्विक शांति और स्थिरता को आगे बढाया, हमारा जुड़ाव गहरा होता जा रहा
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग से दुनियाभर में इसका असर नजर आ रहा। ऐसे में भारत की कोशिश सभी साथी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने पर है। इसी बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत और रूस के संबंधों को लेकर अहम बात कही है।
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलती भूराजनैतिक परिस्थितियों के बीच भारत-रूस के आपसी सहयोग की सराहना की। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडा की ओर’ कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। जयशंकर ने कहा कि दशकों से हमारे आपसी फायदे वाले सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और तरक्की को आगे बढ़ाया है। आज के बदलते भू-राजनैतिक हालात में हमारा जुड़ाव लगातार गहरा होता जा रहा है, जो लगातार हाई-लेवल बातचीत से प्रेरित है।
जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए, भारत मानवता को प्राथमिकता देने और जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए आगे बढ़ रहा है। रूस के साथ मिलकर भारत साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी तरीके से समाधान करने के लिए तत्पर है। अंत में, मैं अपनी दीर्घकालिक साझेदारी और प्रिय मित्रता को मजबूत करने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराना चाहता हूं।
जयशंकर ने इस दौरान रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीते साल हुए भारत यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुतिन का दिसंबर 2025 में हुआ भारत दौरा कई नए आयाम लेकर आया। इस दौरान मोबिलिटी से लेकर हेल्थ और फूड सेफ्टी, मेरीटाइम सहयोग समेत कई मुद्दों पर अहम समझौते हुए। इस यात्रा के दौरान फर्टिलाइजर्स, कस्टम और कॉमर्स, एकेडमिक और मीडिया कोऑपरेशन पर भी अहम फैसले हुए। दोनों ही पक्षों ने आपसी ट्रेड को 68.7 बिलियन डॉलर से 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा।
ईवीएम जयशंकर ने भारत-रूस सबंधों को लेकर कहा कि इसे बेहद बैलेंस तरीके से लगातार आगे ले जाने पर फैसला हुआ। इसके साथ ही भारतीय वर्कफोर्स का सही इस्तेमाल हो इस पर भी बात हुई। ट्रेड में फ्री टैरिफ को लेकर भी चर्चा की जा रही। रूस पहले से ही सिविल न्यूक्लियर एनर्जी को लेकर पार्टनर रहा है। कुडानकुलम न्यूक्लियर प्रोजेक्ट इसका स्पष्ट उदाहरण है। भारत लगातार न्यूक्लियर एनर्जी जेनरेशन क्षमता को बढ़ाने पर फोकस कर रहा है। इस 2047 तक 100 किलोवॉट तक ले जाने की योजना है।
जयशंकर आगे बोले कि मुझे लगता है कि रूस हमारा भरोसेमंद और मजबूत सहयोगी बना रहेगा। रूस बेहद शांति से इस न्यूक्लियर एनर्जी में हमारा सपोर्ट करेगा। योग, आयुर्वेद से आर्ट और कल्चर में लोगों से जुड़ाव बढ़ रहा है। भारत के ब्रिक्स की अध्यक्षता जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि हमारी पूरी कोशिश मानवता पहले और लोगों को केंद्र रखते हुए आगे बढ़ने की अप्रोच रही है। रूस से के साथ हमारा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए जयशंकर ने भारत-रूस के विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। विदेश मंत्री ने कहा कि बदलती बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए ब्रिक्स, एससीओ, जी20 और संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न माध्यमों से अधिक सहयोग की आवश्यकता है।