कविता में खिला बसंत: नागरी प्रचारिणी सभा में आगरा महानगर लेखिका समिति की गोष्ठी में सृजन का मधुमास
आगरा। आगरा महानगर की साहित्यिक चेतना को सजीव करते हुए आगरा महानगर लेखिका समिति की मासिक साहित्यिक गोष्ठी बुधवार को नागरी प्रचारिणी सभा के सभागार में ‘बसंत’ विषय पर अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा और रचनात्मक ऊर्जा के साथ आयोजित की गई। कार्यक्रम का वातावरण आरंभ से ही उल्लास और सृजनात्मक ऊष्मा से सराबोर रहा।
गोष्ठी का शुभारंभ समिति की संरक्षिका शांति नागर एवं संस्थापिका डॉ. शैल बाला द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। दीप की ज्योति के साथ ही सभागार में मानो सृजन का मधुमास उतर आया। इसके पश्चात मंजरी टंडन ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय और सरस बना दिया।
कार्यक्रम का कुशल एवं काव्यात्मक संचालन समिति की सचिव निधि गर्ग ने सुसंयोजित शैली में किया। गोष्ठी में डॉ. कमलेश नागर, पुष्पा सिंह, मीरा परिहार, डॉ. रेखा कक्कड़, विजया तिवारी, डॉ. आभा चतुर्वेदी, डॉ. अल्का चौधरी, दीपा मंगला, अनिता सान्याल सहित अन्य सदस्याओं ने विविध रंगों से सजी अपनी काव्य प्रस्तुतियां दीं।
कविताओं में कहीं प्रकृति के नवविहान की कोमल आहट थी, तो कहीं जीवन के पतझड़ के बाद लौटती हरियाली की आश्वस्त अभिव्यक्ति। कोयल की कूक, सरसों की पीताभ छटा, आम्र-मंजरियों की सुगंध और मन के नवांकुर, बसंत के ये सभी भाव शब्दों में सजीव होकर श्रोताओं के मन को छूते रहे। प्रत्येक प्रस्तुति का श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
गोष्ठी में बसंत के बहाने आशा, उल्लास और रचनात्मक ऊर्जा का सुंदर समागम देखने को मिला। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह साहित्यिक आयोजन बसंत की मधुर स्मृतियों और सृजन की ताजगी के साथ सभी के मन में स्थायी छाप छोड़ गया।
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