काव्य दीपोत्सव में झरने लगी भावनाओं की सरिता, कवियों ने हास्य-श्रृंगार और ओज से सजाई शाम

आगरा। साहित्य निधि एवं ओपन कला मंच द्वारा आयोजित काव्य दीपोत्सव एवं विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों की ओजस्वी वाणी, हास्य की फुहार और श्रृंगार की मधुर लहरों ने ऐसा वातावरण रचा कि पूरा सभागार भावनाओं के रस में भीग उठा। फतेहाबाद रोड स्थित होटल क्लार्क्स इन स्वीट्स में रविवार को आयोजित इस काव्य महोत्सव ने दीपावली के पूर्व ही उत्सव की छटा बिखेर दी।

Oct 12, 2025 - 19:52
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काव्य दीपोत्सव में झरने लगी भावनाओं की सरिता, कवियों ने हास्य-श्रृंगार और ओज से सजाई शाम
फतेहाबाद रोड स्थित होटल क्लार्कस इन स्वीट्स में साहित्य निधि एवं ओपन कला मंच द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते राष्ट्रीय ओज कवि मोहित सक्सेना।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। देशभर से आए प्रसिद्ध कवियों ने मंच से अपने-अपने काव्य पाठ के माध्यम से राज, समाज और संस्कृति पर प्रखर भावनाएं व्यक्त कीं।

मंच पर झलकी कविता की विविधता

राजस्थान के दौसा से आई श्रृंगार रस की कवित्री सपना सोनी ने गणपति व सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ कर वातावरण को भक्तिभाव से आलोकित किया। इसके बाद प्रसिद्ध गीतकार और संयोजक वीरेंद्र नरवार ‘हृदय’ ने अपनी रचना—

माना कि हिंसा से केवल बर्बादी होती है पर,
हिंसा बिना अहिंसा का अस्तित्व नहीं हो सकता।
से दर्शकों को विचारशील कर दिया।

कार्यक्रम के सूत्रधार राष्ट्रीय ओज कवि मोहित सक्सेना ने गर्जनभरे स्वर में कहा—

ओज कवि यदि चीख-चीख मंदिर पर बात नहीं करते,
तो अवधपुरी में रामलला का मंदिर कौन बनवाता।

फरीदाबाद से आए कवि दिनेश रघुवंशी ने अपने काव्य गीत से प्रेम और संवेदना को यूँ व्यक्त किया—

मैं अक्सर सोचता रहता हूँ मेरी ज़िंदगानी में,
तेरी आवाज़ ना होती तो कुछ भी नहीं होता।

इंदौर के चर्चित कवि अतुल ज्वाला ने श्रोताओं को मुस्कान का संदेश देते हुए कहा—

उदासी मत सजाइए चेहरे के गुलदान में,
हंसी बहुत ज़रूरी है खुद को ज़िंदा रखने के लिए।

कार्यक्रम के अतिथि पूरन डाबर ने कहा कि यह आयोजन सनातन संस्कृति को समर्पित है और युवाओं को प्रेरणा देने वाला मंच बन चुका है। संस्था के संरक्षक प्रदीप कुलश्रेष्ठ और सुनील शर्मा ने बताया कि हर वर्ष यह आयोजन और भी प्रभावशाली होता जा रहा है, जिससे समाज में संस्कृति, सभ्यता और साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

कार्यक्रम का संयोजन मोहित सक्सेना ने किया और आयोजन की देखरेख हीरेंद्र हृदय के नेतृत्व में हुई।

SP_Singh AURGURU Editor