सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एसिड अटैक करने वालों पर हत्या की कोशिश का मुकदमा चलना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक के मामलों में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि जबरन एसिड पिलाने वाले अपराधियों पर हत्या के प्रयास (धारा 307) के तहत मुकदमा चलना चाहिए, न कि सिर्फ गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप में।
नई दिल्ली: अब एसिड अटैक करने वाले बदमाशों पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कहा है कि एसिड अटैक करने वालों पर हत्या की कोशिश के प्रोविजन के तहत मुकदमा चलना चाहिए, उन मामलों में जहां उन पर विक्टिम को जबरदस्ती एसिड पिलाने का आरोप हो। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि ऐसे मामलों पर अटेम्प्ट टू मर्डर के तहत केस चलना चाहिए, न कि जान-बूझकर गंभीर चोट पहुंचाने के प्रोविजन के तहत।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कोई दूसरी राय नहीं होनी चाहिए। इन मामलों पर 307 (अटेम्प्ट टू मर्डर: पहले के आईपीसी का सेक्शन 307, BNS में सेक्शन 109) के प्रोविजन के तहत केस चलना चाहिए। पीनल लॉ में भी ज्यादातर घिनौने और अमानवीय मामलों में एक छूट जोड़ी जा सकती है। इन लोगों (हमलावरों) को समाज में घूमने का कोई हक नहीं है। वे समाज के लिए खतरा हैं, आम लोगों के लिए खतरा हैं और कानून के राज के लिए खतरा हैं।
कोर्ट 2009 की एसिड अटैक सर्वाइवर और एनजीओ ब्रेव सोल्स फाउंडेशन की फाउंडर शाहीन मलिक की PIL पर सुनवाई कर रही थी। शाहीन मलिक ने मांग की थी कि ज़बरदस्ती एसिड पीने के शिकार लोगों को पहचान मिलनी चाहिए और उन्हें दिव्यांग लोगों के अधिकारों के तहत “एसिड अटैक पीड़ितों” की परिभाषा में शामिल किया जाना चाहिए।