इनकम टैक्स रेड से बचाने के नाम पर पूरन डावर से पांच करोड़ वसूलने की कोशिश में तीन धरे गये
आगरा के प्रमुख शू एक्सपोर्टर पूरन डावर को नकली आयकर रेड की धमकी देकर पांच करोड़ रुपये वसूलने की योजना का खुलासा हुआ है। धमकी एक लिखित पत्र के जरिए भेजी गई थी, जिसमें भेजने वालों ने खुद को डावर परिवार का शुभचिंतक और आयकर विभाग में पहुंच बताने वाला बताया। पत्र मिलने के बाद पूरन डावर ने मामले की जानकारी पुलिस कमिश्नर को दी; पुलिस ने तुरंत विशेष टीम बना कर जाल बिछाया और पत्र में बताए स्थान पर पैसे लेने आए दो संदिग्धों को धर दबोचा। पुलिस का अनुमान है कि यह साजिश किसी अंदरूनी शख्स की मदद से रची गई है और जांच कई एंगल से की जा रही है।
-आयकर विभाग की रेड के नाम पर रकम ऐंठना चाहते थे शातिर, पुलिस ने जाल बिछाकर दो आरोपियों और चाय वाले के धर दबोचा
यह पत्र सम्भव डावर को संबोधित था, जो पूरन डावर के पुत्र हैं। पत्र में धमकाने वालों ने फर्जी तरीके से दावा किया कि आयकर विभाग के रेड विभाग के इंच्रार्ज पास उनकी सारी संपत्तियों की फाइल है और डावर ग्रुप की फैक्ट्री व कारोबार से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां उसी फाइल में हैं। पत्र में साफ लिखा था कि तय तारीख व समय तक पैसे न दिए गए तो आयकर की बड़ी कार्रवाई कर दी जाएगी और किसी को बताने पर गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। भेजने वालों ने खुद को 'शुभचिंतक' बताते हुए कहा कि आयकर विभाग तो फाइल दबाने के लिए दस करोड़ मांग रहा था, लेकिन मैंने इन्हें पांच करोड़ में राजी कर लिया है।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने रणनीति बनाई
बकौल पूरन डावर, यह पत्र पढ़ने के बाद उन्होंने पहले तो उनका मन किया कि इसे फाड़कर फेंक दें, लेकिन चूंकि इसमें वसूली के लिए समय, तिथि और स्थान का जिक्र था, इसलिए उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को देना उचित समझा। उन्होंने आगरा के पुलिस कमिश्नर को सूचित किया और वह पत्र पुलिस को सौंप दिया। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामला संवेदनशील होने के कारण प्राथमिकता पर लिया और आरोपियों को पकड़ने के लिए रणनीति बनाई।
पुलिस ने कार्टन में नकदी की जगह किताबें रखकर जाल बिछाया
धमकी भरे पत्र में पांच करोड़ की रकम दो-तीन कार्टन में गुरुद्वारा गुरु का ताल के सामने स्थित फ्लाईओवर के नीचे एक चाय वाले के पास पहुंचाने को कहा गया था। यह रकम 12 अक्तूबर को दो बजे पहुंचाने की बात कही गई थी। पुलिस ने पत्र में दिए निर्देशानुसार बताए गए स्थान पर एक कार्टन रखा, परंतु उसमें नकदी नहीं बल्कि किताबें व कॉपियां रखी गईं। सादे वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मी उस कार्टन की निगरानी कर रहे थे। कुछ समय बाद जैसे ही दो युवक कार्टन उठाने आए, उन्हें घटनास्थल पर ही दबोच लिया गया। गिरफ्तार किये गये आरोपियों के नामों का पुलिस ने अभी खुलासा नहीं किया है।
गिरफ्तारी व पूछताछः अंदरूनी शख्स की आशंका तेज
पकड़े गए दोनों युवकों से पूछताछ में पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या इन्हें किसी डॊवर फैक्ट्री से जुड़े व्यक्ति द्वारा तो नहीं भेजा गया था। पुलिस का मानना है कि इस साजिश में कोई ऐसा शख्स शामिल हो सकता है जिसे कंपनी के आंतरिक कामकाज की पूरी जानकारी हो। पुलिस अधिकारी बता रहे हैं कि पूछताछ जारी है और मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंचने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाईः विशेष टीम, कई एंगल से जांच
आगरा पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम गठित कर मामले की तह तक जाने का काम शुरू कर दिया है। टीम संदिग्धों के मोबाइल, कॉल-लॉग, मैसेज, भेजे-प्राप्त कागजात और अन्य जानकारियों की पड़ताल कर रही है। साथ ही फैक्ट्री के अंदर संभावित गड़बड़ी या जानकारी लीक करने वाले किसी कर्मचारी/कॉन्ट्रैक्टर की संभावनाओं को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि रंगदारी रैकेट का पूरा भंडाफोड़ जल्द किया जाएगा।
पत्र में दिए गए निर्देश और चुनी हुई जगह — पार्सल लेने की कार्यप्रणाली
पत्र में पार्सल देने व लेने का विस्तृत तरीका भी लिखा गया था। गुरुद्वारे के पास फ्लाइओवर के नीचे चाय वाले को लिफाफा देने का निर्देश, ड्राइवर को दो-तीन कार्टन लेकर भेजने का निर्देश और कार्टन में बच्चों की किताबें होने का बहाना बताने का निर्देश पत्र में स्पष्ट था। साथ ही पत्र में पर्ची पर एक कोड नंबर रखने व उसके आधार पर कार्टन सौंपने की बात भी कही गई थी। पुलिस ने उसी प्रक्रिया का उपयोग करके जाल बिछाया और कार्टन में नकदी रखने के स्थान पर किताबें रखकर गिरफ्तारियों को अंजाम दिया।
मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंचने के प्रयास
पुलिस प्रवक्ता ने बयान में कहा है कि दोनों गिरफ्तार संदिग्धों से गहन पूछताछ की जा रही है और मुख्य साजिशकर्ता तक पहुँचने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं; आरोपियों के नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होते ही विस्तृत एफआईआर व गिरफ्तारी की सूची सार्वजनिक की जाएगी।