आगरा में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरीः आलू उत्पादकों के लिए एक नई उम्मीद 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आगरा के सींगना गांव में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इसके लिए 110 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृत कर दी गई है। यह केंद्र आलू और शकरकंद की उत्पादकता बढ़ाने, उत्तर कटाई (पोस्ट-हार्वेस्ट) प्रणालियों को मजबूत करने और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने के माध्यम से कृषि नवाचार, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को भी प्रोत्साहित करेगा। इससे भारत को दक्षिण एशिया में सतत एवं जलवायु-संवेदनशील कंद फसलों की खेती के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने में मदद मिलेगी।

Jun 25, 2025 - 20:31
 0
आगरा में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरीः आलू उत्पादकों के लिए एक नई उम्मीद 

-बृज खंडेलवाल-

आगरा, जिसे दुनिया ताजमहल के लिए जानती है, वह भारत के आलू उत्पादन में भी एक प्रमुख स्थान रखता है। उत्तर प्रदेश का 27% आलू आगरा मंडल में पैदा होता है, जिससे यह क्षेत्र राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है। हालांकि, पारंपरिक खेती, बीज की कमी, और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव ने इस क्षेत्र की संभावनाओं को पूरी तरह से विकसित होने से रोका है। लेकिन अब, अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीएसएआरसी) की स्थापना से आगरा के आलू किसानों के लिए एक नई उम्मीद जगी है।

आगरा में आलू उत्पादन की वर्तमान स्थिति 

उत्पादन क्षमता और चुनौतियाआगरा जिले में 71,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर आलू की खेती होती है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होता है। बीज की कमी एक बड़ी समस्या है। किसानों को महँगे दामों पर बीज खरीदना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है, लेकिन बाजार में उन्हें 10 रुपये प्रति किलो से भी कम दाम मिलता है। भंडारण और प्रसंस्करण की कमी के कारण 15-20% आलू खराब हो जाता है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है।

किसानों की मुश्किलें

लागत बनाम आय का असंतुलन: आलू की खेती में बीज, खाद, सिंचाई और श्रम पर होने वाला खर्च किसानों की आय से अधिक हो जाता है। 

बाजार तक पहुंच का अभाव: अधिकांश आलू दक्षिण भारत और गुजरात भेजा जाता है, जहां बिचौलिए किसानों को कम दाम देते हैं।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा से आलू की पैदावार प्रभावित हो रही है। 

भविष्य की संभावनाएः सीएसएआरसी एक नई राह

25 जून, 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आगरा के सींगना गांव में अंतर्राष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीएसएआरसी) की स्थापना को मंजूरी दी है। यह निर्णय आगरा के आलू किसानों के लिए राहत लेकर आया है।

सीएसएआरसी के लाभ

उन्नत बीजों का विकास: सीएसएआरसी जलवायु-अनुकूल और रोगरोधी आलू की किस्में विकसित करेगा, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी। वर्तमान में आगरा के किसान कुफरी बहार पर निर्भर हैं, लेकिन नई किस्मों से उन्हें बेहतर बाजार मिलेगा।

कटाई के बाद प्रबंधन: कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देकर, आलू के नुकसान को कम किया जाएगा। किसानों की आय बढ़ाने के उपाय: मूल्य संवर्धन (जैसे आलू के चिप्स, स्टार्च) से किसानों को अधिक लाभ मिलेगा । 

निर्यात को बढ़ावा: भारत वर्तमान में 1 बिलियन डॉलर मूल्य का आलू निर्यात करता है, जिसे सीएसएआरसी की मदद से बढ़ाया जा सकता है।

दक्षिण एशिया में नेतृत्वः यह केंद्र न केवल भारत बल्कि नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों के लिए भी आलू अनुसंधान का हब बनेगा।

SP_Singh AURGURU Editor