रक्षा मंत्रालय से प्रस्ताव मिलते ही छावनी परिषदो के विलय में देरी नहीं करेगी यूपी सरकार- योगी

आगरा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जैसे ही केंद्र के रक्षा मंत्रालय से उत्तर प्रदेश की छावनी परिषदों को नजदीकी निकाय में विलय का प्रस्ताव प्राप्त होगा, उत्तर प्रदेश सरकार अनुमति देने में देर नहीं करेगी।

Jul 21, 2025 - 18:41
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रक्षा मंत्रालय से प्रस्ताव मिलते ही छावनी परिषदो के विलय में देरी नहीं करेगी यूपी सरकार- योगी
मुख्यमंत्री से मुलाकात करते विधायक डॉ. जीएस धर्मेश, पूर्व विधायक केशो मेहरा एवं राजेश गोयल

-यूपी की नौ छावनी परिषदों के निकायों में विलय को लेकर मुख्यमंत्री से मिले विधायक डॊ. धर्मेश और पूर्व विधायक केशो मेहरा

मुख्यमंत्री ने यह भरोसा छावनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक और पूर्व राज्य मंत्री डॉ. जीएस धर्मेश की उस मांग पर दिया, जिसमें उन्होंने यूपी के नौ कैंटोनमेंट बोर्ड को स्थानीय निकायों में शामिल करने की बात कही थी। डॊ. धर्मेश ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास कालिदास मार्ग पर मुलाकात की थी। इस दौरान डॉ. धर्मेश के साथ पूर्व विधायक व वरिष्ठ भाजपा नेता केशो मेहरा और कैंटोनमेंट बोर्ड के सदस्य राजेश गोयल भी थे।

तीनों भाजपा नेताओं की ओर से इस दौरान सीएम योगी को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपकर प्रदेश के सभी 9 छावनी परिषदों (कैंटोनमेंट बोर्ड) को स्थानीय नगर निकायों में शामिल करने की मांग की गई थी।

स्थानीय योजनाओं से वंचित हैं कैंट एरिया के नागरिक

मुख्यमंत्री से चर्चा में विधायक धर्मेश और पूर्व विधायक केशो मेहरा ने कहा कि कैंट एरिया के नागरिक राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं, क्योंकि छावनी परिषदें एक अलग प्रशासनिक ढांचा हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में छावनी परिषदों का निकायों में विलय पहले ही किया जा चुका है। केंद्र सरकार पहले ही छावनी परिषदों को निकायों में विलय के लिए सहमति दे चुकी है। राज्य सरकार यदि रक्षा मंत्रालय से प्रस्ताव प्राप्त होते ही अनुमति प्रदान करती है, तो यह राज्य और केंद्र की समन्वित मंशा के अनुरूप होगा।

यूपी के 9 छावनी परिषदों को शामिल करने की मांग

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश के आगरा, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी, बरेली, मथुरा और झांसी में छावनी बोर्ड हैं। यदि इन्हें आसपास के नगर निकायों में शामिल किया जाता है, तो न सिर्फ प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि सभी योजनाओं का लाभ सीधा जनता तक पहुंचेगा।

SP_Singh AURGURU Editor