घूंघट से फूटा गांव का दर्द, उटंगन पर पुल के लिए बेमियादी धऱना दे रहीं महिलाएं बोलीं- रास्ता होता तो हमारे बच्चे भी बोलते फादर-मदर
पिनाहट। आजादी के करीब आठ दशक बाद भी यदि किसी गांव के लोग चारपाई और ट्यूब के सहारे नदी पार करने को मजबूर हों, गर्भवती महिलाओं को जंगलों के रास्ते अस्पताल ले जाना पड़ता हो और बच्चों की पढ़ाई सिर्फ इसलिए छूट रही हो क्योंकि गांव तक सड़क नहीं है, तो यह सिर्फ बदहाली नहीं बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। ग्राम पंचायत अरनोटा के गांव सुखलालपुरा में यही दर्द गुरुवार को उस समय छलक पड़ा, जब घूंघट की ओट में धऱने पर बैठी महिलाओं ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर करारा प्रहार करते हुए कहा- अगर गांव में रास्ता होता तो हमारे बच्चे भी पढ़-लिखकर फादर और मदर बोलना सीखते।
भारतीय किसान यूनियन जय हिंद के नेतृत्व में उटंगन नदी किनारे ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्रामीणों ने गांव के लिए पक्का मार्ग, उटंगन नदी पर पुल निर्माण और रेलवे अंडरपास बनाकर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक हजार की आबादी वाला सुखलालपुरा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव जंगल के बीच बसा हुआ है और बाजार तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। गांव के किनारे बह रही उटंगन नदी को ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार करते हैं। कई बार लोग चारपाई, ट्यूब और अस्थायी सहारों के जरिए नदी पार करने को मजबूर होते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है।
धरना प्रदर्शन के दौरान नवविवाहिता सीमा पत्नी कालीचरण और कमला देवी पत्नी करन सिंह ने घूंघट की ओट से गांव की पीड़ा बयां की। महिलाओं ने कहा कि सड़क और पुल न होने के कारण बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा पाते। जंगल के रास्तों और जंगली जानवरों के डर के बीच बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि गांव तक सड़क और नदी पर पुल बन जाए तो बच्चे भी पढ़-लिखकर समाज में आगे बढ़ सकेंगे।
ग्रामीण संजीव कुमार ने बताया कि बदहाल रास्तों और नदी पार करने की मजबूरी ने कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी है। उन्होंने बताया कि एक वर्ष पूर्व रक्षाबंधन के दौरान नदी पार करते समय एक युवक बह गया था। वहीं दो वर्ष पहले दाखश्री पत्नी हरप्रसाद की रेलवे पटरी पार करते समय दर्दनाक मौत हो गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि अब तक सात लोगों की जान इस अव्यवस्था की भेंट चढ़ चुकी है।
ग्रामीण महिला खिलौनिया देवी ने बताया कि गांव तक पहुंचने में भारी दिक्कत होने के कारण सामाजिक रिश्तों पर भी असर पड़ रहा है। जंगल और नदी के कारण लोग गांव आने से कतराते हैं, जिससे विवाह संबंध तय करने में भी परेशानी होती है।
ग्राम प्रधान रामनिवास वर्मा ने साफ कहा कि जब तक ग्रामीणों की मांगें पूरी नहीं होंगी, धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की।
वहीं ग्रामीण अवधेश वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि उटंगन नदी पर पुल और रेलवे अंडरपास बनाकर सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं कराया गया तो ग्रामीण आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
धरना प्रदर्शन के दौरान थाना बसई अरेला पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। इस दौरान पूर्व प्रधान चंपाराम, रामहेत वर्मा, कालीचरण, प्रेम सिंह, बहोरन सिंह, भगवती प्रसाद, रामप्रसाद, देवेंद्र, रेशमा देवी, रैशी देवी, बेबी, गुड़िया, नन्ही, प्रेमा देवी, सावित्री सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।