वॉटरशेड कमेटी अब जलागम समिति कहलाएगी, ग्राम प्रधान होंगे अध्यक्ष, जल संरक्षण और भूमि प्रबंधन देखेगी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जल संसाधनों के संरक्षण और भूमि प्रबंधन की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब राज्य में वॉटरशेड कमेटी को ‘जलागम समिति’ के नाम से जाना जाएगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के अंतर्गत इस नई पहचान के साथ समिति ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में गठित की गई है।
स्थानीय जुड़ाव के लिए बदला गया नाम
परती भूमि विकास विभाग के राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जीएस नवीन कुमार ने जानकारी दी कि ग्रामीण क्षेत्रों में योजना की बेहतर समझ, भागीदारी और जागरूकता के लिए वॉटरशेड कमेटी का नाम बदलकर ‘जलागम समिति’ रखा गया है। यह नाम ग्रामीणों को भाषा और सोच के स्तर पर योजना से आत्मीय रूप से जोड़ने में मदद करेगा।
ग्राम प्रधान करेंगे नेतृत्व
नवगठित जलागम समिति का नेतृत्व ग्राम प्रधान करेंगे। इस समिति में पंचायती राज संस्थाओं की सहभागिता के साथ विभिन्न विभागों और समुदाय का समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। इससे ग्राम स्तर पर जल संरक्षण और भूमि सुधार की योजनाएं अधिक प्रभावी ढंग से लागू की जा सकेंगी।
केंद्र की योजनाओं से मिल रहा सहयोग
सीएम योगी की अगुवाई में राज्य सरकार बीते आठ वर्षों से जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ और ‘कैच द रेन’ जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। इस दौरान हजारों चेक डैम, जलाशय और तालाबों का निर्माण हुआ है। अब जलागम समिति इस प्रयास को ग्रामीण स्तर पर और मजबूत बनाएगी।
जल संरक्षण में उत्तर प्रदेश को मिलेगी नई गति
इस नवाचार से प्रदेश में जल संसाधनों का संरक्षण और बेहतर भूमि प्रबंधन सुनियोजित ढंग से होगा। जलागम समितियां स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार कार्य करेंगी जिससे ‘हर खेत को पानी’ जैसी अवधारणाओं को सफलतापूर्वक ज़मीन पर उतारा जा सकेगा।