पुलिस ने भीड़ को कुबेरपुर से सुमन के आवास तक आने दिया, क्यों?
आगरा। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर करणी सेना और अन्य राजपूत संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा किये गये बवाल और तोड़फोड़ की घटना के लिए क्या आगरा पुलिस भी बराबर की जिम्मेदार है। यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए कुबेरपुर में एकत्रित हुए कार्यकर्ता आगरा में सुमन के आवास तक कैसे पहुंच गये। पुलिस ने क्यों नहीं इन्हें कुबेरपुर पर ही रोक लिया।
-क्षत्रिय नेताओं को नजरबंद कर पुलिस यह भूल गई कि कुबेरपुर में लोग इकट्ठे हो चुके हैं
रामजी लाल सुमन द्वारा राज्य सभा में राणा सांगा को गद्दार कहे जाने के बाद आक्रोश व्याप्त हो गया था। उनके इस बयान का चौतरफा विरोध हो रहा था। इसी क्रम में तीन दिन पहले आगरा में करणी सेना समेत कई अन्य राजपूत संगठनों ने सुमन के आवास को घेरने का ऐलान किया था। इसके लिए सभी संगठनों ने अपने कार्यकर्ताओं को 26 मार्च को कुबेरपुर में एकत्रित होने को कहा था।
राजपूत संगठनों के इस ऐलान का पुलिस ने संज्ञान लिया था। इसी वजह से आगरा में निवास करने वाले विभिन्न राजपूत संगठनों के नेताओं को पुलिस ने आज सुबह से ही उनके घरों पर ही नजरबंद कर दिया था। किसी भी क्षत्रिय नेता को पुलिस ने उनके घर से बाहर नहीं निकलने दिया।
पुलिस ने नेताओं को उनके ही घरों से न निकलने देकर शायद यह सोच लिया कि उसने स्थिति को कंट्रोल कर लिया है, जबकि पुलिस ने कुबेरपुर की ओर समुचित ध्यान नहीं दिया, जहां विभिन्न संगठनों के आह्वान पर सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्रित हो चुके थे। ये सभी कार्यकर्ता अपनी घोषणानुसार कुबेरपुर से आगरा की ओर बढ़ने लगे और संजय प्लेस एचआईजी फ्लैट्स स्थित सांसद सुमन के आवास तक पहुंच गये।
ऐसा भी नहीं है कि करणी सैनिक गुपचुप तरीके से सांसद के आवास पर पहुंचे हों। वे बाकायदा गाड़ी पर सवार होकर वहां पहुंचे तो ये सब कुछ पुलिस को क्यों नजर नहीं आया। पुलिस चाहती तो इन लोगों को बहुत पहले ही रोक सकती थी।
सवाल यह है कि सैकड़ों लोग कुबेरपुर से चलकर आगरा शहर में सांसद सुमन के आवास तक पहुंच गये और पुलिस ने उन्हें 12-14 किलोमीटर के बीच में कहीं पर भी रोकने का प्रयास क्यों नहीं किया। रोकने के प्रयास एमजी रोड पर वहां हुए, जहां से सांसद सुमन का घर बहुत नजदीक था। शायद इस भीड़ को सुमन के आवास से पहले ही रोक कर समझाया गया होता तो बवाल की नौबत नहीं आती।