बिहार चुनाव से पहले तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की ‘कैमिस्ट्री’ ठंडी सी क्यों दिख रही?
बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आ चुकी हैं। नीतीश कुमार की 20 साल पुरानी सत्ता को उखाड़ने में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे तेजस्वी यादव के महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नजर नहीं आ रहा। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच मनमुटाव तो महसूस किया जा रहा था, लेकिन अब तो मतभेद गहराए से दिखने लगे हैं। यहां तक कि अब गठबंधन की एकजुटता पर ही सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और सीट बंटवारे को लेकर उपजे असंतोष ने कांग्रेस को भीतर से आहत कर दिया है, जबकि तेजस्वी अभी भी इस स्थिति से बेफिक्र होकर अपने ही बूते पर सरकार बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। कुल मिलाकर महागठबंधन के समीकरण डगमगाते दिख रहे हैं।
अब राजनीतिक प्रेक्षक इस सवाल का जवाब ढूंढने में लगे हुए हैं कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद की ओर से सीएम पद के दावेदार तेजस्वी यादव सरकार बनाने के लिए एकजुट हैं या फिर एक-दूसरे को नीचे गिराने में जुट गये हैं।
दोनों नेताओं के बीच पहले जैसी कैमिस्ट्री नजर नहीं आ रही। यह स्थिति तब से पैदा हुई जब तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के समक्ष यह हालात पैदा कर दिए कि वह तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का दावेदार न केवल स्वीकार करे अपितु उसकी घोषणा भी करे। कांग्रेस की स्थिति तब और दयनीय हो गई थी कि तेजस्वी यादव को सीएम दावेदार स्वीकार करने के बाद कांग्रेस के समक्ष वीआईपी के नेता मुकेश सहनी ने ऐसे हालात बना दिए कि कांग्रेस को उन्हें डिप्टी सीएम के चेहरे के रूप में स्वीकार करना पड़ा।
मुकेश सहनी मात्र 15 सीटों पर लड़ रही है। वीआईपी से तीन गुनी से ज्यादा सीटों पर लड़ रही कांग्रेस इसके बाद भी अपने एक लिए एक डिप्टी सीएम पद तक नहीं मांग सकी। शायद इन हालातों को राजीव गांधी स्वीकार न कर पाते, इसलिए उन्होने इन घोषणाओं के लिए अपने वरिष्ठ नेता अशोक गहलौत को पटना भेजा था।
माना जा रहा है कि इसी के बाद से कांग्रेस ने महागठबंधन को महज औपचारिकता मानकर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। तेजस्वी यादव ने जिस तरह कांग्रेस को झुकने के लिए मजबूर किया है, उससे राहूल गांधी ही नहीं पूरी कांग्रेस आहत है। यही वजह है कि कांग्रेस की ओर से प्रचार में वैसा जोश नहीं दिख रहा, जैसा दिखना चाहिए। कांग्रेस के असहज होने की दूसरी वजह यह है कि तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले कम सीटों पर लड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
बिहार में चुनाव प्रचार शुरू हो जाने के कई दिन बाद तक राहुल गांधी और प्रियंका गांधी प्रचार के लिए नहीं गये। राहुल गांधी बाद में जनसभा करने पहुंचे भी तो उनके निशाने पर पीएम मोदी रहे जबकि यह चुनाव नीतीश कुमार की सत्ता के खिलाफ हो रहा है। राहुल गांधी ने एक बार फिर अपने ही अंदाज में पीएम मोदी के लिए तू तड़ाक की भाषा का इस्तेमाल किया। राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि राहुल गांधी महागठबंधन के लिए माहौल बनाने के बजाय समस्या खड़ी कर आए हैं।
कांग्रेस खुद को अपमानित सा महसूस कर रही है। इसका नतीजा यह है कि महागठबंधन में वैसी यूनिटी और तालमेल नहीं दिख रहा, जैसा कि एनडीए में नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि न तो सीएम पद के दावेदार तेजस्वी यादव और न ही कांग्रेस आलाकमान की ओर से तालमेल बनाने की कोई कोशिश की जा रही।
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