बरेली में 118 करोड़ के फर्जी कारोबार का पर्दाफाश, कागजी कंपनियों से जीएसटी लूटने वाले गिरोह पर पुलिस का शिकंजा

-आरके सिंह- बरेली। बरेली में फर्जी और अस्तित्वहीन कंपनियों के माध्यम से करोड़ों रुपये का कागजी कारोबार दिखाकर जीएसटी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर क्राइम थाना और बरेली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में खुलासा हुआ कि गिरोह ने फर्जी फर्मों के नाम पर करीब 118 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार दर्शाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अवैध लाभ लिया। पुलिस ने इस मामले में दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है।

Jul 23, 2026 - 12:32
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बरेली में 118 करोड़ के फर्जी कारोबार का पर्दाफाश, कागजी कंपनियों से जीएसटी लूटने वाले गिरोह पर पुलिस का शिकंजा
फर्जी कारोबार के बारे में जानकारी देते बरेली के एसपी क्राइम मनीष कुमार सोनकर।

बरेली पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज, कूटरचित आधार कार्ड, चेकबुक, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से फर्जीवाड़े से जुड़े कई अहम राज सामने आने की उम्मीद है।

एसपी क्राइम मनीष कुमार सोनकर ने बताया कि थाना साइबर क्राइम और बरेली पुलिस टीम ने फर्जी एवं अस्तित्वहीन फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये का फर्जी व्यापार दर्शाकर जीएसटी (GST) और आईटीसी (ITC) फ्रॉड करने वाले संगठित गिरोह का खुलासा किया है। कार्रवाई के दौरान गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि आरोपी जाली बिल और ई-वे बिल तैयार कर फर्जी लेनदेन दिखाते थे और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गाजियाबाद निवासी योगेन्द्र शर्मा और टिम्पु के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को 21 जुलाई को मालगोदाम रोड के पास से गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से दो लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, कई चेकबुक, 3.18 करोड़ रुपये से अधिक के हस्ताक्षरित चेक और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह आम लोगों को रुपये का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराता था। इसके बाद इन फर्मों के जरिए कागजों पर खरीद-बिक्री दिखाकर जीएसटी रिटर्न दाखिल किए जाते थे। इसी प्रक्रिया के माध्यम से गिरोह इनपुट टैक्स क्रेडिट का अवैध लाभ लेता था।

जांच में यह भी पता चला है कि फर्जी कारोबार से प्राप्त रकम को डिजिटल वॉलेट, सर्कुलर ट्रेडिंग और हवाला नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर किया जाता था। पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस पूरे आर्थिक नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

इस मामले की शुरुआत 30 मई 2026 को सहायक आयुक्त राज्य कर की शिकायत से हुई थी। प्रारंभिक जांच में पीसी इंटरप्राइजेज नामक फर्म के माध्यम से करीब 20 करोड़ रुपये का फर्जी कारोबार और 1.28 करोड़ रुपये के जीएसटी फ्रॉड का खुलासा हुआ था। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर फर्जीवाड़े का दायरा बढ़ता गया और पूरा नेटवर्क करीब 118 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच गया।

बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने बताया कि मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। बरामद दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और फर्जी कंपनियों के बारे में भी जानकारी सामने आएगी। कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम को एसएसपी ने 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

SP_Singh AURGURU Editor