जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की 38वीं वार्षिक कार्यशाला शुरू, देश–विदेश के 500 से अधिक विशेषज्ञ वृद्धावस्था की समस्याओं पर कर रहे मंथन, कन्वोकेशन सत्र में आठ डॉक्टरों को मिली फैलोशिप, 100 डॉक्टरों ने ली जेरिएट्रिक केयर की प्रैक्टीकल ट्रेनिंग, उद्घाटन के बाद मंत्री योगेंद्र उपाध्याय बोले- डॉक्टरों को हत्यारा बनाने वाली शिक्षा मानवता के लिए खतरा
आगरा में आयोजित जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की 38वीं वार्षिक कार्यशाला न केवल वृद्धावस्था चिकित्सा का अंतरराष्ट्रीय मंच बनी, बल्कि शिक्षा, संस्कार और मानवता पर गंभीर आत्ममंथन का सशक्त स्वर भी बनी। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने उद्घाटन सत्र में डॉक्टरों को हिंसक और संवेदनहीन बना देने वाली शिक्षा प्रणाली पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि संस्कारविहीन शिक्षा सम्पूर्ण मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। तीन दिवसीय इस कार्यशाला में देश–विदेश से आए 500 से अधिक विशेषज्ञ वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों, उनके वैज्ञानिक उपचार, सामाजिक दायित्व और मानवीय मूल्यों पर गहन विमर्श के साथ प्रैक्टीकल प्रशिक्षण में सहभागिता कर रहे हैं।
आगरा। धरती पर भगवान का रूप माने जाने वाले डॉक्टरों को हत्यारा बनाने वाली शिक्षा आखिर कौन-सी है। यह प्रश्न आज पूरे समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। कलम थामने की उम्र में हाथों में पत्थर देने वाली शिक्षा सम्पूर्ण मानवता के लिए खतरा बनती जा रही है। यह विचार उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की 38वीं वार्षिक तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन के अवसर पर व्यक्त किए।
होटल क्लार्क्स-शिराज में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में देश-विदेश से आए 500 से अधिक विशेषज्ञ वृद्धावस्था से जुड़ी समस्याओं, बीमारियों के कारणों, उनके निवारण तथा आधुनिक उपचार पद्धतियों पर गहन मंथन करेंगे। साथ ही डॉक्टरों के लिए प्रैक्टीकल ट्रेनिंग सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।
उद्घाटन समारोह में दीप प्रज्ज्वलन के साथ शिक्षा और संस्कारों की भूमिका पर चर्चा हुई। मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि राष्ट्रीय संस्कार हर चुनौती का समाधान हैं और समाज व देशहित में किया गया कार्य ही सच्ची भक्ति है। इस अवसर पर जीएसआई के पदाधिकारियों को शॊल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
जीएसआई के राष्ट्रीय सचिव डॉ. वीके हांडा ने संस्था के वार्षिक कार्यक्रमों की जानकारी दी। जीएसआई के मार्गदर्शक डॉ. वीके अरोरा ने सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को बधाई दी।
जीएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने मुख्य अतिथि योगेंद्र उपाध्याय को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। राष्ट्रीय सचिव डॉ. ओपी शर्मा ने बताया कि 1982 में स्थापित जीएसआई के आज 1600 से अधिक सदस्य हैं।
आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सुनील बंसल ने बताया कि भारत के विभिन्न प्रांतों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया और यूके से भी प्रतिनिधि इस कार्यशाला में सहभागिता कर रहे हैं। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कैलाश विश्वानी ने किया, जबकि संचालन डॉ. आशीष गौतम, डॉ. अजीत चाहर, डॉ. एके वर्मा और डॉ. सुमित लवानिया ने किया।
कन्वोकेशन में आठ डॉक्टरों को मिली फैलोशिप

जेरिएटिक सोसाइटी ऒफ इंडिया की 38वीं वार्षिक कार्यशाला के कन्वोकेशन सत्र में फैलोशिप पाने वाले चिकित्सक जीएसआई के पदाधिकारियों और वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ।
कन्वोकेशन सत्र में जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया की फैलोशिप आठ डॉक्टरों को प्रदान की गई, जिनमें आगरा के डॉ. कैलाश विश्वानी और डॉ. प्रभात अग्रवाल भी शामिल रहे। साइंटिफिक सेशंस में डॉ. पद्मा मलिक खन्ना ने कैमिस्ट्री ऑफ एजिंग, डॉ. विनोद कुमार ने वृद्धावस्था में डिमेंशिया, डॉ. कैलाश रंजन दास ने वृद्धावस्था में वैक्सीनेशन, डॉ. धमीजा ने स्ट्रोक तथा डॉ. पीसी डेश ने वातावरण के बुढ़ापे पर प्रभाव विषय पर व्याख्यान दिए। इसके अतिरिक्त मोटापा, इंसुलिन, जीवनशैली और उम्र संबंधी अन्य रोगों पर भी विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
100 डॉक्टरों ने ली जेरिएट्रिक केयर की प्रैक्टीकल ट्रेनिंग
कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न प्रांतों से आए जेरिएट्रिक कोर्स की ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे 100 डॉक्टरों ने प्रैक्टीकल ट्रेनिंग प्राप्त की। प्रशिक्षण उपरांत सभी को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। डॉ. पंकज अग्रवाल ने इंसुलिन लगाने की तकनीकों पर वर्कशॉप कराई, जबकि डॉ. अश्विन, डॉ. बालकृष्णन और डॉ. साजेश अशोकन ने प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया।