ओकेंद्र राणा को पकड़ नहीं पाई आगरा पुलिस, हाईकोर्ट से मिली राहत ने बढ़ाई चुनौती
आगरा। सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर हुए हिंसक प्रदर्शन के प्रमुख आरोपी करणी सेना नेता ओकेंद्र सिंह राणा को गिरफ्तार करने में विफल रही आगरा पुलिस को अब एक और झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने ओकेंद्र राणा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि जब तक याची के खिलाफ पुख्ता और विश्वसनीय साक्ष्य सामने न आएं, गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की निष्क्रियता और असमर्थता भी खुलकर सामने आई है। ओकेंद्र राणा ने सांसद सुमन के आवास पर प्रदर्शन के केस में नामजद होने के बाद दो-तीन बार आगरा का दौरा किया। सबसे हालिया उदाहरण शमसाबाद रोड स्थित नौबरी गांव का है, जहां पुलिस को उनकी मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। पुलिस ने गांव पहुंचकर राणा की घेराबंदी भी की, लेकिन ओकेंद्र राणा चकमा देकर फरार हो गए।
सांसद लगातार उठाते रहे सवाल
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन इस मामले को लेकर कई बार आगरा पुलिस पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जब आरोपी लगातार जिले में सक्रिय है और पुलिस को खुली चुनौती दे रहा है, फिर भी उसे गिरफ्तार न कर पाना बेहद शर्मनाक है।
सांसद के पुत्र और पूर्व विधायक रणजीत सुमन द्वारा आगरा के हरीपर्वत थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उनके आवास पर हमला किया और अभद्र व्यवहार किया। वहीं, सांसद की सुरक्षा में तैनात एक उपनिरीक्षक ने भी अलग मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें सरकारी कार्य में बाधा व मारपीट जैसी धाराएं शामिल थीं।
कोर्ट की शर्तें
इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने दोनों मामलों में याची ओकेंद्र राणा को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि यदि विवेचना के दौरान उनके खिलाफ ठोस सबूत सामने आते हैं, तो गिरफ्तारी की जा सकती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा अर्नेश कुमार और मोहम्मद असफोक आलम मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। साथ ही, कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि जांच 60 दिनों के भीतर पूरी की जाए।
पुलिस के लिए बढ़ी मुश्किल
हाईकोर्ट की रोक के बाद अब आगरा पुलिस की अगली कार्रवाई और भी संवेदनशील हो गई है। ओकेंद्र राणा की गिरफ्तारी में पहले ही विफल हो चुकी पुलिस अब कानूनी चौखटे में रहकर ही अगला कदम उठा सकती है। राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है।