जब तक हिंदी कमजोर है, तब तक हमारी पहचान अधूरी है

आगरा। स्वतंत्रता सेनानी, मार्क्सवादी विचारक और सामाजिक न्याय के योद्धा का. महादेव नारायण टंडन की 22वीं पुण्यतिथि पर माथुर वैश्य सभागार  में परंपरागत रूप से स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस वर्ष व्याख्यान का विषय था "हमारी हिंदी के अवसर और संकट"।

Apr 7, 2025 - 19:44
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जब तक हिंदी कमजोर है, तब तक हमारी पहचान अधूरी है
माथुर वैश्य सभागार में कामरेड महादेव नारायण टंडन स्मृति व्याख्यान में मंचस्थ प्रो. अभय कुमार दुबे, डॊ. कुसुम चतुर्वेदी एवं अन्य अतिथि।  

-कामरेड महादेव नारायण टंडन स्मृति व्याख्यान का विषय था- हमारी हिंदी के अवसर और संकट

कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ शिक्षाविद एवं कवयित्री डॉ. कुसुम चतुर्वेदी, अतिथि वक्ता प्रो. अभय कुमार दुबे, डॉ. देव स्वरुप, का. पूरन सिंह और भावना जितेंद्र रघुवंशी द्वारा कामरेड टंडन के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

मुख्य वक्तव्य में बाबा आमटे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति डॉ. देव स्वरुप ने कामरेड टंडन के अतुलनीय व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि टंडन जी एक ऐसे जननायक थे जो सदैव वंचितों, शोषितों और मजदूरों की आवाज बने रहे।

विषय प्रवर्तन करते हुए का. डॉ. जे. एन. टंडन ने कहा, आज हिंदी का संकट यही है कि हिंदी भाषी समाज अपनी भाषा से भावनात्मक रूप से कट चुका है। जब तक हिंदी कमजोर है, तब तक हमारी पहचान अधूरी है।

मीडिया विश्लेषक प्रो. अभय कुमार दुबे ने अपने व्याख्यान में हिंदी के ऐतिहासिक संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा, हिंदी को यूरोपीय शैली की राष्ट्रभाषा के रूप में थोपे बिना भारत की संपर्क भाषा बनना था। यह उसका सबसे बड़ा संघर्ष है। आज भी अंग्रेज़ी प्रभुत्व की विरासत और सरकारी तथा सामाजिक क्षेत्रों के बीच की खाई हिंदी के विकास में बाधा बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि हिंदी के नादान समर्थक, अनजाने में ही अंग्रेज़ी के लिए रास्ता साफ़ कर रहे हैं। हिंदी ही एकमात्र भाषा है जो अंग्रेज़ी के प्रसार और प्रभुत्व का प्रभावी मुकाबला कर सकती है।

प्रो. अभय कुमार दुबे को डॉ. स्मिता टंडन  द्वारा स्मृति चिह्न भेंट किया गया। कार्यक्रम का संचालन हरीश चिमटी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन का. पूरन सिंह ने किया।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री चो. उदय भान सिंह, रामनाथ गौतम, ज्योत्सना रघुवंशी, डॉ. वीआर सेंगर, डॉ. अजय कालरा, डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, शिवराज यादव, डॉ. मधुरिमा शर्मा, डॉ. मुनिश्वर गुप्ता सहित अनेक शिक्षाविद, बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor