पौधारोपण का पर्यावरणीय सच: क्या गड्ढा खोदकर तुरंत पौधा लगाना उचित है?
आगरा। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर आगरा में पौधारोपण की होड़ लगी रही। सरकारी महकमों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर कोई हाथ में पौधा लिए नजर आया। पौधारोपण भी हुआ, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा कि जिस तरह से यह पौधारोपण किया जा रहा है, वह पर्यावरण और उस पौधे के लिए सही भी है या नहीं?
गड्ढा खोदते ही पौधारोपण करना सही नहीं
जानकारों के अनुसार पौधारोपण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से किया जाना जरूरी होता है। लेकिन अधिकतर आयोजनों में इसका पालन नहीं होता। विभिन्न संगठनों को पर्यावरण के प्रति प्रेम दिखाना था, सो दिखा दिया। गड्ढे खोदे और पौधे रोप दिए।
पौधारोपण से पहले की जाती है ‘सीजनिंग’
आगरा में ईको क्लब के जरिए हरियाली के लिए लगातार सक्रिय प्रदीप खंडेलवाल कहते हैं, वास्तव में, पौधारोपण से एक माह पूर्व गड्ढे खोद लिए जाने चाहिए। इन गड्ढों में लगातार 15 दिन तक पानी भरा जाता है, ताकि गड्ढे की मिट्टी में मौजूद भीतरी गर्मी और गैसें बाहर निकल जाएं। इसे ‘सीजनिंग’ कहा जाता है। इसके बाद उर्वरक और पेस्टीसाइड्स डालकर मिट्टी से गड्ढे को भर दिया जाता है और 15 दिन तक छोड़ दिया जाता है।
दूसरी बारिश के बाद ही रोपें पौधा
पौधारोपण के लिए दूसरी बारिश का इंतजार करना जरूरी है, क्योंकि तब मिट्टी में नमी पर्याप्त होती है और पौधे के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।
कल जल्दबाजी में हुई हरियाली की खानापूर्ति
कल पर्यावरण दिवस के अवसर पर बहुत-से लोगों और संगठनों ने यह समझे बिना पौधारोपण करेंगे तो उनका लगाया गया पौधा 15 दिन भी जीवित रह पाएगा या नहीं, पौधारोपण कर दिया गया। यह एक प्रकार से औपचारिक हरियाली बनकर रह गया।
वनस्पति विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हम सच में हरियाली और पर्यावरण की रक्षा करना चाहते हैं तो हमें पौधारोपण के पीछे की वैज्ञानिक प्रक्रिया और समयबद्धता को समझना होगा। सिर्फ चाहे जब पौधे लगाने और फिर पौधारोपण का फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने भर से पर्यावरण को लाभ नहीं होगा।