आगरा में नहीं थम रहा हरित कत्लेआम: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियां, संरक्षण क्षेत्र बना कटान ज़ोन
आगरा। हाल ही में ईद उल जुहा जैसे त्योहार पर लोग जीवन की क़द्र और कुर्बानी के मर्म को समझ रहे थे, वहीं आगरा के बीरई गांव (ब्लॉक सैंया) में वन माफिया खुलेआम प्रकृति की कुर्बानी कर रहे थे। ईद के दिन हरे नीम और अन्य प्रजातियों के पेड़ों पर आरी चलाई गई। यह कोई अलग घटना नहीं थी, बल्कि उसी सिलसिले की अगली कड़ी थी, जिसकी शुरुआत कुछ दिन पहले विश्व पर्यावरण दिवस के दिन ही शमसाबाद ब्लॉक के कुर्राचित्तरपुर गांव के गौहरपुर बीहड़ से हो चुकी थी।
टीटीजेड (ताज ट्रेपेजियम ज़ोन) जैसी संरक्षित और संवेदनशील पर्यावरणीय परिधि में हरे पेड़ों की इस बर्बर कटाई ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश सिर्फ कागज़ों में रह गए हैं?
कट रहे पेड़, मौन है विभाग
विश्व पर्यावरण दिवस के दिन गौहरपुर बीहड़ में नीम और अन्य प्रजातियों के दर्जनों पेड़ काटे गए थे। सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए, स्थानीय मीडिया ने रिपोर्टिंग की, पर वन विभाग की ओर से ‘जांच की जा रही है’ जैसी रटी-रटाई प्रतिक्रिया ही मिली।
तीन-चार दिनों तक यह अवैध कटान होता रहा और विभाग मूकदर्शक बना रहा। जब मामला तूल पकड़ गया, तब महज़ खानापूरी के लिए दो-चार पेड़ों की कटाई की बात मान ली गई।
खुलेआम कटान, लेकिन एक्शन सिर्फ फाइलों में
जो पेड़ जमींदोज किए गए, उनके ठूंठ अब भी खारी नदी के किनारे दिखाई दे रहे हैं। उनके आसपास लकड़हारे काम करते हुए देखे गए, लेकिन विभाग की ओर से कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, न ही कोई वाहन ज़ब्त हुआ। यानी कटान सार्वजनिक और कार्रवाई गोपनीय। यह है आगरा के वन विभाग का मौजूदा चेहरा।
कानूनी दंड भी नहीं डरा पाए माफिया को
हाल के महीनों में टीटीजेड क्षेत्र में अवैध कटान के कुछ मामलों में एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपियों को दंडित किया है। इसके बावजूद माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। उन्हें प्रशासनिक चुप्पी और ढीली कार्यवाही का ऐसा कवच मिला है कि कोई नियम, कोई कानून उनकी राह में बाधा नहीं बन पा रहा।
जनता में रोष, भरोसे की टूटन
पर्यावरण कार्यकर्ता, समाजसेवी और स्थानीय नागरिक इस ‘हरी हत्या’ को लेकर बेहद आक्रोशित हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना पर कोई सज़ा क्यों नहीं? पेड़ काटने वाले कौन हैं और कौन दे रहा है उन्हें संरक्षण? जब वीडियो, फोटो और चश्मदीद सब कुछ मौजूद है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
टीटीजेड में ग्रीन ज़ोन से कटिंग ज़ोन की ओर बढ़ता आगरा
ताजमहल की नाजुक हवा और आगरा की हरियाली अब खतरे में हैं। जिस ताज ट्रेपेजियम ज़ोन की स्थापना ही प्रदूषण नियंत्रण और हरित संतुलन के लिए हुई थी, वह आज पेड़ कटान का केंद्र बनता जा रहा है। अगर इसी तरह चलता रहा तो आने वाले वर्षों में आगरा की पहचान धरोहर से अधिक रेगिस्तान के रूप में होगी।