पुलिस कछुआ चाल चलेगी तो फिर तो साइबर ठग कामयाब हो ही जाएंगे
आगरा। कमला नगर के व्यापारी विकास गंभीर के रिश्तेदारों से बीते कल हुई साइबर ठगी के मामले में पुलिस का रवैया बहुत सारे सवाल खड़े करता है। उन्हें तीन घंटे में मदद मिल पाई, तब तक उनके बहुत सारे निकट संबंधी ठगी का शिकार हो चुके थे। इस घटना से एक बात और साफ हुई है कि पुलिस और साइबर सेल के बीच समन्वय का अभाव है।
साइबर ठगों ने विकास गंभीर की आईडी हैक कर उनके कांटेक्ट की लिस्ट हासिल कर ली थी। इसके बाद साइबर अपराधियों ने उनकी फोटो लगे नंबर से रिश्तेदारों को कुछ जरूरत बताते हुए पैसे की डिमांड शुरू कर दी। रिश्तेदारों को यही लगा कि विकास गंभीर ही पैसे मांग रहे हैं। कमला नगर के प्रमोद वाटिका के ए-167 निवासी विकास गम्भीर को बीते कल पूर्वाह्न में किसी रिश्तेदार के जरिए ही इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल पुलिस की साइबर क्राइम हेल्प लाइन नंबर से सम्पर्क साधने की कोशिश की। कई बार फोन किया लेकिन फोन नहीं मिला।
थकहार कर विकास गंभीर ने 112 नंबर पर कॊल किया। 112 से उन्हें संबंधित थाने जाने के लिए कह दिया गया। विकास गंभीर कमला नगर थाने पहुंचे तो वहां एसओ ने उनसे कहा कि साइबर अपराध सेल में जाइए। कमला नगर थाना साइबर अपराध सेल के पुलिस कर्मचारियों ने भी पहले तो विकास को टरकाने की कोशिश की लेकिन बहस के बाद उनकी रिपोर्ट लिखी गई।
इस समूची प्रक्रिया में तीन घंटे का समय लग गया। इतने समय में विकास गंभीर के कुछ रिश्तेदार ने साइबर अपराधियों को पैसा भेज चुके थे। विकास गंभीर के फोटो लगे नंबर से पैसे मांगे गए तो उनके बहुत से रिश्तेदारों ने तो पैसे भेजने से पहले उन्हें फोन कर लिया इसलिए वे ठगी का शिकार होने से बच गए, लेकिन कुछ रिश्तेदारों ने अपराधियों के झांसे में आकर पैसे डाल दिए।
साइबर ठगी की इस घटना में एक बात सामने आती है कि पुलिस में आंतरिक तौर पर समन्वय का अभाव है। पहली बात तो यह कि साइबर हेल्पलाइन का नंबर पर फोन ही नहीं हुआ। दूसरी बात 112 ने थाने पर भेज दिया। अगर पुलिस इसी तरह टालमटोल करेगी तो फिर तो साइबर अपराधी अपने मकसद में कामयाब होते ही रहेंगे।