2030 तक भारत का फ़ुटवियर बाज़ार 47 अरब डॉलर का होगा, तीन दिवसीय मीट एट आगरा 8 नवम्बर से

आगरा। मीट एट आगरा जैसे आयोजन देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत  बनाने में मददगार साबित होते हैं। सरकार और औद्योगिक संगठनों के ऐसे प्रयासों से मौजूदा 26 अरब डॉलर का भारतीय फुटवियर बाज़ार 2030 तक 47 अरब डॉलर तक हो सकता है। 

Oct 21, 2024 - 20:31
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2030 तक भारत का फ़ुटवियर बाज़ार 47 अरब डॉलर का होगा, तीन दिवसीय मीट एट आगरा 8 नवम्बर से
मीट एट आगरा के बारे में जानकारी देते एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर। साथ हैं अन्य पदाधिकारी।

यह दावा है एफमेक के अध्यक्ष पूरन डावर का। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि फुटवियर बाजार में वृद्धि ग़ैर चमड़े के जूते जैसे खेल के जूते, दौड़ने के जूते, केजुअल वियर और स्नीकर्स की मांग में हो रही वृद्धि का फ़ायदा उठाकर की जा सकती है। 

अध्यक्ष डावर ने बताया कि जूता उद्योग के महाकुम्भ के रूप में विख्यात लेदर, फुटवियर कंपोनेंट्स एन्ड टेक्नोलाजी  फेयर ‘मीट एट आगरा’ के 16वें संस्करण की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। आगरा फुटवियर मैन्युफेक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स चैम्बर (एफमेक) द्वारा सींगना स्थित आगरा ट्रेड सेंटर पर आयोजित हो रहा तीन दिवसीय फेयर मीट एट आगरा आठ से 10 नवम्बर तक चलेगा।

एफमेक के अध्यक्ष पूरन डावर ने बताया कि लगभग 35 से अधिक देश और लगभग 200 से अधिक एग्जीबिटर्स इस साल इस आयोजन में भाग ले रहे हैं।  इस फेयर में इस साल लगभग 6 हजार ट्रेड विजिटर्स और 20 हजार से अधिक फुटफाल के आने की संभावना है। भारत विश्व की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। इसको रफ्तार देने में आगरा का जूता उद्योग अहम् भूमिका निभा रहा है। 

फेयर ऑर्गनाइजिंग कमेटी के चेयरमैन गोपाल गुप्ता ने कहा कि आगरा के जूता कारोबारियों के लिए खुशी की बात है कि वर्ल्ड फुटवियर कलेण्डर में शामिल ‘मीट एट आगरा’ का भारत के लोगों को ही नहीं दुनिया के 35 से अधिक देशों के जूता उद्योग से जुड़े कारोबारियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस वार का ‘मीट एट आगरा’ कई मायनों में खास होगा। न्यू टेक्नोलाजी , न्यू इनोवेशंस और नेशनल-इंटरनेशनल मार्केट के न्यू ट्रेंड्स... फुटवियर इंडस्ट्री में आपकी बिजनेस ग्रोथ से जुड़े हर जरुरी सवाल का जबाव आपको इस फेयर में एक छत के नीचे मिलेगा। 
 
एफमेक के कन्वीनर कैप्टन ए.एस. राणा ने कहा कि आज हम चाइना के एक मजबूत विकल्प के रूप में खड़े हैं। इस बात को कहने में कोई गुरेज नहीं है कि यह भारत का टर्न है। टाटा, रिलायंस, वालमार्ट और फ्यूचर ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों ने चाइना से आयात पूरी तरह बंद कर चुकी हैं। ये कंपनियां आज भारतीय प्रोडक्ट पर निर्भर हैं। यही कारण है कि हमारा घरेलू बाजार लगातार ग्रोथ हासिल कर रहा है। अब वक्त  है हम अपने प्रोडक्ट्स की क्वालिटी वैश्विक बाजार को ध्यान में रखकर विकसित करें। 

टेक्नीकल सेशंस में दिखेगा जूता उद्योग का वर्तमान और भविष्य

एफमेक महासचिव राजीव वासन ने कहा कि फेयर में टेक्नीकल सेशंस भी होंगे, जिनमें विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे। जिनमें डिजाइन ट्रेंड्स, मैन्युफैक्चरिंग तकनीक, मार्केटिंग स्ट्रेटजी जैसे विषय शामिल हैं। 

कम हो कस्टम ड्यूटी 

एफमेक सचिव ललित अरोड़ा ने कहा कि हमारा मानना है कि तीन डॉलर आयात मूल्य से कम के जूतों-चप्पलों पर कस्टम ड्यूटी 35 फीसदी कर दी जानी चाहिए और घरेलू उद्योग को न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा दिया जाना चाहिए। इससे देश के उत्पादकों को लाभ होगा।

ये रहे मौजूद

इस मौके पर एफमेक के सुधीर गुप्ता, अनिरुद्ध तिवारी, एफएएफएम के अध्यक्ष कुलदीप कोहली, महासचिव नकुल मनचंदा, रोमी मगन, आस्मा के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह लवली आदि विशेष रूप से मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor