पौने दो महीने में एक बेटी की मौत, उसी घर में अब दूसरी बेटी कैसे रह पाएगी
आगरा। सैंया थाना क्षेत्र के वीरई गांव निवासी गोपाल सिंह ने एक ही दिन अपनी दो बेटियों अंकिता और वंदना का कन्यादान किया था। 1 मार्च 2025 को उन्होंने झारपुरा (धिमिश्री) गांव के दो सगे भाइयों सोनू और मोनू के साथ दोनों बेटियों की शादी कर उन्हें विदा किया था।
-अंकिता की शादी के डेढ़ महीने के भीतर मौत की खबर न सभी को हिलाकर रख दिया है
लेकिन किसे पता था कि यह विदाई महज़ डेढ़ महीने में वापसी की एक ऐसी ख़बर लाएगी, जो हर पिता के रोंगटे खड़े कर दे।
16 अप्रैल को पति सोनू अंकिता को मायके से ससुराल झारपुरा ले गया। और फिर… 21 अप्रैल की शाम को गोपाल सिंह को उनके छोटे दामाद मोनू ने फोन करके बताया- अंकिता की मौत हो गई है, अंतिम संस्कार करने ले जा रहे हैं।
हड़बड़ाकर झारपुरा पहुंचे गोपाल सिंह ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, लेकिन तब तक बेटी की चिता जल चुकी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने फोरेंसिक टीम के साथ मिलकर अधजले शव से अवशेष निकलवाए। ये सिर्फ़ राख नहीं थी, एक बाप की उम्मीद, एक बहन की पीड़ा और एक नवविवाहित स्त्री का हक़, जो सब कुछ उसी राख में मिल चुका था।
दहेज की मांग और एक बहन की मौत, अब दूसरी बेटी का क्या होगा?
गोपाल सिंह का आरोप है कि दोनों बेटियों को शादी के बाद से ही दहेज में बाइक और एक लाख रुपये के लिए लगातार परेशान किया जाता था। अब सवाल ये उठता है कि जिस घर में एक बेटी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई, क्या उसी घर में दूसरी बेटी वंदना की ज़िंदगी महफूज़ है?
क्या ये रिश्ता अब भी रिश्तेदारी कहलाएगा या इसे एक खौफनाक सौदा समझा जाएगा? क्या वंदना का भरोसा अब भी ससुराल वाले परिवार और अपने पति मोनू पर टिक पाएगा? क्या कानून समय रहते अंकिता के दोषियों को सज़ा दिलाएगा या ये मौत भी आंकड़ों में गुम हो जाएगी?
पुलिस जांच में जुटी, दर्ज हुआ मुकदमा
सैंया पुलिस ने गोपाल सिंह की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया है और दहेज हत्या की दिशा में जांच जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जल्द ही ससुराल पक्ष के सदस्यों से पूछताछ की जाएगी और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।