प्लास्टिक का जाल, मासूम जानों पर कहरः विश्व पर्यावरण दिवस पर वाइल्डलाइफ एसओएस की मार्मिक अपील

आगरा। विश्व पर्यावरण दिवस 2025 की थीम ‘प्लास्टिक प्रदूषण समाप्त करें’ पर काम करते हुए संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस ने एक बार फिर प्रकृति की पीड़ा को उजागर किया है। वह पीड़ा जो उन मासूम जानवरों पर बीतती है और जो हमारी लापरवाही का शिकार हो जाते हैं।

Jun 4, 2025 - 20:28
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प्लास्टिक का जाल, मासूम जानों पर कहरः विश्व पर्यावरण दिवस पर वाइल्डलाइफ एसओएस की मार्मिक अपील

संस्था के अनुसार, प्लास्टिक सिर्फ़ ज़मीन और नदियों को नहीं, बल्कि जंगली जानवरों के जीवन को भी निगल रहा है।
एक सिवेट कैट जब आगरा एयरफोर्स स्टेशन में प्लास्टिक के जार में फंसी मिली। इसके साथ ही एक मॉनिटर लिज़र्ड जिसका मुंह प्लास्टिक डिब्बे में फंसा मिला, ऐसे दृश्य इंसानियत को झकझोर देने वाले हैं।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने भावुक शब्दों में कहा, ये घटनाएं इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक बड़े संकट की चेतावनी हैं। जंगली जानवरों को हमारी गंदगी में जीने को मजबूर किया जा रहा है। प्लास्टिक उनके लिए एक अदृश्य शिकारी बन चुका है।

शिक्षा, बचाव और युवाओं के ज़रिए बदलाव की पहल

संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस केवल बचाव कार्य ही नहीं कर रही, बल्कि युवाओं को पर्यावरण योद्धा बनाने की भी मुहिम चला रही है। आगरा के सूर सरोवर पक्षी विहार में कॉलेज छात्रों के साथ सफ़ाई अभियान चलाया। मथुरा के ईसीसीसी में बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की। नुक्कड़ नाटक और जागरूकता सत्र जैसे कार्यक्रम भी हुए। इनका उद्देश्य है प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ सामूहिक चेतना जगाना।

संस्था की सह-संस्थापक गीता शेषमणि ने कहा, प्लास्टिक प्रदूषण सिर्फ गंदगी नहीं, ये जैव विविधता का संकट है। हमें यह समझना होगा कि हमारे हर प्लास्टिक कचरे का असर किसी मासूम जान पर हो सकता है।

संरक्षण परियोजनाओं के निदेशक बैजूराज एम.वी. ने बताया, पक्षियों, सरीसृपों से लेकर स्तनधारियों तक, हर दिन हमें दिखता है कि प्लास्टिक कैसे जानलेवा जाल बन गया है। हमारा मकसद इस खतरे को हर आंख के सामने लाना है।

जब तक हम जागेंगे नहीं, जंगल रोते रहेंगे

प्लास्टिक का हर टुकड़ा किसी जीव की ज़िंदगी का दुश्मन बन सकता है। वाइल्डलाइफ एसओएस की यह पहल न सिर्फ़ चेतावनी है, बल्कि एक विनती है। अपने जीवन में प्लास्टिक कम करें, ताकि धरती पर जीवन ज़्यादा बचे।

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SP_Singh AURGURU Editor