दृष्टिबाधित बच्चों के गीत ने जन्मदिन पर भिगो दीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की आंखें  

देहरादून। देश की प्रथम नागरिक और भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आज 67वां जन्मदिन था। उनका यह जन्मदिन केवल एक सरकारी रस्म नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक लम्हा बन गया, जिसने देहरादून में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं और खुद राष्ट्रपति मुर्मू की भी।

Jun 20, 2025 - 21:20
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दृष्टिबाधित बच्चों के गीत ने जन्मदिन पर भिगो दीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की आंखें   
भावनाओं से भरे कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों का गीत सुनते समय भावुक हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आंसू पोंछते हुए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समय उत्तराखंड दौरे पर हैं और देहरादून के दृष्टिबाधित सशक्तिकरण संस्थान में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थीं। यहां दिव्यांग बच्चों ने राष्ट्रपति के सम्मान में ‘बार-बार ये दिन आए…, तुम जियो हजारों साल…’ गीत जब सुरों में पिरोया तो राष्ट्रपति अपनी भावनाएं रोक नहीं सकीं।

गीत सुनते-सुनते भर आईं आंखें, फिर छलक पड़ी भावना

कार्यक्रम जैसे-जैसे आगे बढ़ा, छोटे-छोटे मासूम बच्चे, जो खुद आंखों से नहीं देख सकते, अपनी आत्मा की आंखों से राष्ट्रपति को देख रहे थे। उनके गीतों की गूंज और भावनाओं की गहराई ने वह असर डाला कि राष्ट्रपति की आंखें भर आईं। पहले वे खुद अपने हाथों से आंसू पोंछ रही थीं, लेकिन पीछे खड़े एक सुरक्षा अधिकारी ने चुपचाप एक रूमाल आगे बढ़ाया। उस क्षण की नमी पूरे हॉल में फैल गई।

इस प्यार को शब्दों में नहीं बांध सकती– राष्ट्रपति

बाद में मंच से बोलते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, मैंने जीवन में कई सम्मान देखे हैं, लेकिन आज जो अनुभव किया वह मेरे जीवन की सबसे अनमोल स्मृति बन गया है। इन बच्चों का स्नेह, इनका गीत, मेरी आत्मा को छू गया। इस प्यार को शब्दों में नहीं बांध सकती।

सिर्फ एक गीत नहीं था... यह एक आत्मीय स्पर्श था

इन दृष्टिबाधित बच्चों ने जो गीत गाया, वह केवल सुरों का संयोजन नहीं था, बल्कि उसमें निर्मलता, निश्छल प्रेम और आत्मीयता थी। यही वजह रही कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति भी उस भाव से अछूती नहीं रहीं।

SP_Singh AURGURU Editor