आगरा में 25 घंटे की जद्दोजहद के बाद तालाब से मिली 7 साल की अनु की लाश, गांव में पसरा मातम
आगरा। शमसाबाद क्षेत्र के गढ़ी थाना गांव में एक हंसता-खेलता घर बुधवार की शाम चीखों और आंसुओं में डूब गया। घर के बाहर खेलते-खेलते लापता हुई 7 वर्षीय मासूम अनु की जिंदगी की तलाश बुधवार को एक गहरे तालाब में आकर खत्म हो गई। करीब 25 घंटे तक चले पुलिस और फ्लड पीएसी के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्ची का शव उसी तालाब से बरामद हुआ, जो उसके घर से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
आगरा। शमसाबाद क्षेत्र के गढ़ी थाना गांव में एक हंसता-खेलता घर बुधवार की शाम चीखों और आंसुओं में डूब गया। घर के बाहर खेलते-खेलते लापता हुई 7 वर्षीय मासूम अनु की जिंदगी की तलाश बुधवार को एक गहरे तालाब में आकर खत्म हो गई। करीब 25 घंटे तक चले पुलिस और फ्लड पीएसी के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्ची का शव उसी तालाब से बरामद हुआ, जो उसके घर से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
बताया गया कि मंगलवार को अनु रोज की तरह घर के बाहर खेल रही थी। अचानक वह नजरों से ओझल हो गई। परिजनों ने पहले आसपास तलाश की, रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पूछताछ की, लेकिन बच्ची का कहीं पता नहीं चला। जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिवार की बेचैनी डर में बदलती चली गई। आशंका जताई गई कि मासूम पास के तालाब में गिर गई होगी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी ईस्ट अभिषेक अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे। उनके नेतृत्व में पुलिस और फ्लड पीएसी के गोताखोरों ने तालाब में रेस्क्यू अभियान शुरू किया। गहरे और कीचड़ भरे तालाब में उतरकर गोताखोरों ने घंटों तलाश की। पानी अधिक होने के कारण पंप लगाकर तालाब का पानी निकालने का प्रयास भी किया गया। रात भर और फिर अगले दिन तक चले अथक प्रयासों के बाद आखिरकार बुधवार को अनु का शव पानी से बाहर निकाला जा सका।
जैसे ही बच्ची का शव बाहर आया, मौके पर मौजूद परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। मां बेसुध होकर गिर पड़ी, जबकि पिता की आंखें सूनी हो गईं। पूरे गांव में सन्नाटा छा गया और हर आंख नम हो गई। इस दर्दनाक हादसे को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के बीचों-बीच, घनी आबादी और बच्चों के खेलने की जगह के पास स्थित इस तालाब के चारों ओर कोई तार फेंसिंग या सुरक्षा घेराबंदी नहीं है। पहले भी ग्रामीणों ने इसे लेकर चिंता जताई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि तालाब सुरक्षित होता, तो आज एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
डीसीपी ईस्ट अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि पुलिस और रेस्क्यू टीम ने बच्ची को बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन दुर्भाग्यवश सफलता नहीं मिल सकी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि तालाब के आसपास सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी और आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
एक पल की लापरवाही ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। मासूम अनु की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक खुले तालाब और असुरक्षित स्थान बच्चों की जान लेते रहेंगे।