90 वर्ष की उम्र में रचा साहित्य का इतिहास: चिरंजीलाल चक्खन की ‘प्रेमदूत’ और ‘संगीत रामायण’ का लोकार्पण, राजा महेंद्र प्रताप के जीवन और प्रभु श्रीराम की गाथा को काव्य-संगीत में पिरोकर दिया समाज को अनमोल उपहार

किरावली। चाहरवाटी क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव रोझौली ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और सांस्कृतिक विरासत का परचम बुलंद किया है। 90 वर्षीय साहित्य साधक चिरंजीलाल चक्खन द्वारा रचित दो महत्वपूर्ण कृतियों- ‘प्रेमदूत’ और ‘संगीत रामायण’ का रविवार को गांव रोझौली स्थित उनके निजी मंदिर परिसर में लोकार्पण किया गया। क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की उपस्थिति में दोनों पुस्तकों को समाज को समर्पित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

Jun 8, 2026 - 12:21
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90 वर्ष की उम्र में रचा साहित्य का इतिहास: चिरंजीलाल चक्खन की ‘प्रेमदूत’ और ‘संगीत रामायण’ का लोकार्पण, राजा महेंद्र प्रताप के जीवन और प्रभु श्रीराम की गाथा को काव्य-संगीत में पिरोकर दिया समाज को अनमोल उपहार
रोझौली गांव में चिरंजी लाल चक्खन की दो कृतियों ‘प्रेमदूत’ और ‘संगीत रामायण’ का विमोचन करते अतिथिगण।

प्रतिभाओं की धरती रोझौली ने फिर रचा इतिहास

इतिहास के पन्नों में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला रोझौली गांव सदियों से प्रतिभाओं की जन्मस्थली रहा है। राजनीति, सेना, प्रशासन, विज्ञान, शिक्षा, खेल, साहित्य और न्याय व्यवस्था जैसे अनेक क्षेत्रों में इस गांव के लोगों ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गांव के वरिष्ठ साहित्यकार चिरंजीलाल चक्खन ने अपनी साहित्यिक साधना से क्षेत्र का मान बढ़ाया है।

राजा महेंद्र प्रताप के जीवन पर लिखा ‘प्रेमदूत’ खंड काव्य

चिरंजीलाल चक्खन ने महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रभक्त राजा महेंद्र प्रताप के जीवन संघर्ष, त्याग और राष्ट्रसेवा को केंद्र में रखकर ‘प्रेमदूत’ नामक खंड काव्य की रचना की है। यह कृति नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति और आदर्श जीवन मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेगी।

संगीत रामायण’ में सुरों के साथ जीवंत हुई श्रीराम कथा

लेखक की दूसरी कृति ‘संगीत रामायण’ भगवान श्रीराम के सम्पूर्ण जीवन चरित्र पर आधारित है। इसमें बालकाण्ड से लेकर उत्तरकाण्ड तक की कथा को लोक संगीत, फिल्म संगीत और शास्त्रीय संगीत के मधुर समन्वय के साथ प्रस्तुत किया गया है। कृति की भाषा, भाव और संगीतात्मक प्रस्तुति को लेकर साहित्य प्रेमियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

शिक्षा और साहित्य को समर्पित रहा जीवन

चिरंजीलाल चक्खन का जन्म 20 जून 1943 को रोझौली गांव में श्री गोकुल चंद और श्रीमती कलावती देवी के परिवार में हुआ। उन्होंने हिन्दी, संस्कृत और इतिहास विषयों में एम.ए. तथा बी.एड. की शिक्षा प्राप्त की। वे लंबे समय तक महाविद्यालय में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रहे और शिक्षा के साथ-साथ साहित्य साधना में भी निरंतर सक्रिय रहे।

गांव की गौरवशाली विरासत का हुआ उल्लेख

कार्यक्रम में वक्ताओं ने रोझौली गांव की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि इसी गांव की मिट्टी ने सेना में जनरल पद तक पहुंचे रिपुदमन सिंह और देशराज सिंह जैसे वीर सपूत दिए। मशहूर पहलवान तेजसिंह चाहर ने हिंद केसरी का खिताब जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता श्रीमती चंपावती कई बार विधायक रहीं। देश के प्रथम आईएएस अधिकारियों में शामिल लोकेंद्र अस्थाना इसी गांव से थे और उन्होंने बेल्जियम में राजदूत के रूप में भी सेवाएं दीं। वैज्ञानिक अतर सिंह ने भी देश का नाम विश्व स्तर पर गौरवान्वित किया।

गणमान्य अतिथियों ने किया लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त एडीएम यादराम सिंह, ब्लॉक प्रमुख गुड्डू चाहर, चाहरवाटी महासभा के अध्यक्ष मलखान सिंह भगत, भूतपूर्व प्रधानाचार्य दिगम्बर सिंह चाहर, पुस्तक के सहयोगकर्ता देशराज सिंह चाहर, ग्राम प्रधान केशव सिंह चाहर, ग्राम प्रधान बंटी सिसोदिया तथा जवाहर सिंह सचिव सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दोनों पुस्तकों का लोकार्पण किया।

भावुक हुए लेखक, ग्रामीणों ने किया सम्मान

अपनी वर्षों की साहित्य साधना को पुस्तक रूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत होते देखकर लेखक चिरंजीलाल चक्खन भावुक हो उठे। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों और अतिथियों ने उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य अतिथियों का साफा पहनाकर और माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी कलाकार महावीर सिंह चाहर ने किया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्य प्रेमी, शिक्षाविद, समाजसेवी और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor