नामकरण की खुशियों से पहले घर में मातम, एक ही चारपाई पर सो रहे भाई-बहन को सांप ने डसा

आगरा के कागारौल क्षेत्र के मुरकिया गांव में ठंड से बचने के लिए एक ही चारपाई पर कंबल ओढ़कर सो रहे भाई-बहन को सांप ने डस लिया। भाई पंकज को सांप के काटने का पता चल गया, लेकिन बहन कामिनी को इसका एहसास नहीं हुआ। पंकज के पैर में सांप लिपटा देखकर कामिनी उसे बचाने के लिए चीखती रही। कुछ देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार के मुताबिक पंकज के बेटे का जन्म महज 10 दिन पहले हुआ था और गुरुवार को उसका नामकरण होना था। नामकरण से एक दिन पहले कामिनी की मौत से घर की खुशियां मातम में बदल गईं। पंकज का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

Sep 17, 2026 - 18:10
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नामकरण की खुशियों से पहले घर में मातम, एक ही चारपाई पर सो रहे भाई-बहन को सांप ने डसा
बहन और भाई, जिन्हें सांप ने डंस लिया।

भाई के पैर से लिपटा सांप तो मचा शोर, बहन को पता ही नहीं चला कि उसे भी डस चुका है, भइया को बचाने के लिए चिल्लाती रही कामिनी, अस्पताल पहुंचने पर तोड़ा दम

आगरा। कागारौल क्षेत्र के मुरकिया गांव में घर की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। ठंड से बचने के लिए एक ही चारपाई पर कंबल ओढ़कर सो रहे भाई-बहन को कंबल में छिपे सांप ने डस लिया। सांप के डसने के बाद भाई पंकज को तो इसका एहसास हो गया, लेकिन उसकी बहन कामिनी को पता तक नहीं चला कि सांप उसे भी डस चुका है।

पंकज के पैर से सांप के लिपटने के बाद उसने शोर मचाया। शोर सुनकर कामिनी भी उठ गई और उसने भाई के पैर पर काले रंग का सांप देखा। वह घबराकर भाई को बचाने के लिए चीखती रही। बार-बार कहती रही कि “भइया को जल्दी अस्पताल ले जाओ, उसे बचा लो।” उसे उस वक्त जरा भी अंदाजा नहीं था कि सांप के जहर का असर उसके शरीर में भी पहुंच चुका है। कुछ देर बाद कामिनी की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे उल्टियां होने लगीं और सीने में जलन व चक्कर की शिकायत हुई। इसके बाद परिजनों को पता चला कि उसे भी सांप ने डसा था। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

दस दिन पहले घर में गूंजी थी किलकारी

इस दर्दनाक घटना ने परिवार को उस वक्त झकझोर दिया, जब घर में नवजात बच्चे के नामकरण संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। पंकज के पिता राकेश के मुताबिक, करीब 10 दिन पहले पंकज के घर बेटे का जन्म हुआ था। गुरुवार को बच्चे का नामकरण संस्कार होना था। कार्यक्रम के लिए रिश्तेदार भी घर पहुंचने लगे थे। परिवार में खुशी का माहौल था और बच्चे के नामकरण की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन बुधवार की रात हुई घटना ने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं।

एक ही चारपाई पर सोए थे भाई-बहन

राकेश ने बताया कि बुधवार रात कमरे में कामिनी और पंकज एक ही चारपाई पर सो रहे थे। रात में ठंड बढ़ने पर दोनों ने कंबल ओढ़ लिया। किसी को अंदाजा नहीं था कि उसी कंबल में एक सांप छिपा हुआ है। बताया गया है कि सांप ने पहले कामिनी को डसा। इसके बाद वह पंकज के पैर से लिपट गया और उसे भी काट लिया। पंकज को जैसे ही सांप के काटने का एहसास हुआ, उसने शोर मचा दिया।

भाई के पैर में सांप लिपटा देखकर सहम गई कामिनी

पंकज की आवाज सुनकर कामिनी की नींद खुली। उसने जब भाई के पैर की तरफ देखा तो वहां काले रंग का सांप दिखाई दिया। सांप देखकर वह बुरी तरह घबरा गई। कामिनी को उस समय यह पता नहीं था कि सांप उसे भी डस चुका है। वह भाई की जान बचाने के लिए परिवारवालों से मदद की गुहार लगाती रही। वह लगातार कहती रही कि पंकज को तुरंत अस्पताल ले जाया जाए। परिजन पंकज को लेकर अस्पताल की ओर दौड़े। उन्हें उस समय कामिनी के सांप के काटने की जानकारी नहीं थी।

भाई का इलाज चल रहा था, तभी घर से आया दूसरा फोन

राकेश के मुताबिक, पंकज को रात में ही जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज शुरू किया गया। परिवार के लोग पंकज की हालत को लेकर चिंतित थे। इसी दौरान घर से फोन आया कि कामिनी की हालत अचानक बिगड़ गई है। उसे उल्टियां हो रही हैं। सीने में जलन और चक्कर आने की शिकायत थी। इसके बाद परिवार को शक हुआ कि कहीं कामिनी को भी सांप ने तो नहीं डसा था। जब घटना को जोड़कर देखा गया तो सामने आया कि सांप ने कामिनी को भी काटा था।

अस्पताल में इलाज के दौरान कामिनी की मौत

परिजन कामिनी को भी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। इलाज के दौरान कामिनी की मौत हो गई। कामिनी की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। जिस घर में अगले दिन नवजात के नामकरण की तैयारी होनी थी, वहां अचानक मातम छा गया।

झाड़-फूंक भी कराई, लेकिन नहीं बच सकी जान

परिजन कामिनी के शव को घर लेकर आए। इसके बाद परिवार ने सपेरों और झाड़-फूंक करने वालों को भी बुलाया। परिजनों ने हर संभव कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। बुधवार रात करीब आठ बजे परिवार ने कामिनी का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, पंकज को शमसाबाद रोड स्थित जीआर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार चल रहा है। परिवार उसकी हालत को लेकर चिंतित है और उसकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहा है।

एक तरफ बेटी की मौत का गम, दूसरी तरफ नवजात की चिंता

राकेश के मुताबिक, कामिनी उनके दिवंगत भाई की बेटी थी। इसलिए वह उनके परिवार का बेहद करीबी हिस्सा थी। उसकी अचानक मौत से परिवार गहरे सदमे में है। एक तरफ परिवार की आंखों के सामने बेटी को खोने का गम है, तो दूसरी तरफ पंकज की जिंदगी बचाने की चिंता। जिस बच्चे के जन्म के महज दस दिन बाद घर में नामकरण की तैयारियां चल रही थीं, उसी घर में अब मातम पसरा है।

दस महीने पहले हुई थी पंकज की शादी

राकेश ने बताया कि पंकज ने 11वीं तक पढ़ाई की है। करीब दस महीने पहले ही उसकी शादी खुशबू से हुई थी। शादी के कुछ ही महीने बाद उसके घर बेटे का जन्म हुआ। दस दिन पहले बेटे के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल था। गुरुवार को बच्चे के नामकरण संस्कार की तैयारी थी। रिश्तेदारों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो चुका था। लेकिन नामकरण से ठीक एक रात पहले हुई सांप के डसने की घटना ने परिवार की खुशियों को चीख-पुकार और मातम में बदल दिया। एक मासूम की जिंदगी बचाने के लिए अब परिवार अस्पताल में उम्मीद लगाए बैठा है, जबकि जिस बेटी ने अपने भाई को बचाने के लिए आखिरी वक्त तक आवाज लगाई, वह हमेशा के लिए परिवार से दूर हो चुकी है।