मुनि समत्व सागर बोले-धन-दौलत नहीं, व्यवहार से होती है इंसान की पहचान

आगरा के रकाबगंज-छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में पयुर्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म के अवसर पर आत्मस्पंदन ध्यान शिविर आगरा-2026 का शुभारंभ हुआ। मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज सहित संतों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने अभिषेक, पूजन और शांतिधारा में हिस्सा लिया। प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति की पहचान धन, यश, महंगे कपड़ों या पारिवारिक प्रतिष्ठा से नहीं बल्कि उसके व्यवहार और आचरण से होती है। उन्होंने अहंकार और क्रोध के संबंध को समझाते हुए आत्मचिंतन और विनम्रता का संदेश दिया। 19 सितंबर को उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर अभिषेक, पूजन, विधान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

Sep 17, 2026 - 18:56
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मुनि समत्व सागर बोले-धन-दौलत नहीं, व्यवहार से होती है इंसान की पहचान

आगरा में आत्मस्पंदन ध्यान शिविर का आगाज, श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक, पूजन और शांतिधारा 

आगरा। रकाबगंज-छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में जैन धर्मावलंबियों के पर्युषण  पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म के पावन अवसर पर आत्मस्पंदन ध्यान शिविर आगरा-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण के बीच आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साह और भक्तिभाव के साथ सहभागिता की।

शिविर का आयोजन संतचर्या शिरोमणि श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के तीन अनमोल रत्न एवं परम प्रभावक शिष्य श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर महाराज और श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर महाराज के सानिध्य तथा पंडित प्रदीप शास्त्री, दमोह के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धालुओं ने अभिषेक, पूजन और शांतिधारा के साथ की। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट सहित विभिन्न मंगलाचरण कार्यक्रम हुए। पूरे दिन निर्मल सेवा सदन परिसर में भक्ति, साधना, अनुशासन और आत्मचिंतन का वातावरण बना रहा।

'व्यक्ति की पहचान धन से नहीं, उसके व्यवहार से होती है'

प्रवचन के दौरान मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को बाहरी चमक-दमक और प्रतिष्ठा के बजाय व्यक्ति के आचरण को महत्व देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के पास धन, यश, प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाएं होना उसे स्वतः अच्छा व्यक्ति नहीं बना देता। कोई व्यक्ति मधुर भाषा में बात करता है या हमेशा शांत दिखाई देता है, इससे भी उसके भीतर के भावों की पूरी पहचान नहीं हो सकती। मुनि श्री ने कहा कि किसी व्यक्ति को पहचानना हो तो केवल उसकी वेशभूषा, पैसा, यश, कीर्ति या परिवार की प्रतिष्ठा को आधार नहीं बनाना चाहिए। उसके व्यवहार और आचरण को भी देखना जरूरी है।

'प्रतिष्ठित परिवार का मतलब सिर्फ धन-वैभव नहीं'

मुनि श्री समत्व सागर महाराज ने कहा कि समाज में अक्सर व्यक्ति की पहचान उसके परिवार की प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिति से की जाती है। लेकिन वास्तविक प्रतिष्ठा का संबंध व्यक्ति के व्यवहार और संस्कारों से होना चाहिए। उन्होंने समझाया कि सुख-सुविधाएं उपलब्ध होने पर कोई व्यक्ति शांत दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके भीतर अहंकार या कषाय हो सकती है। इसलिए किसी व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव को समझने के लिए उसके व्यवहार को परखना जरूरी है।

'3 Idiots' के उदाहरण से समझाया अहंकार का असर

प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने अपनी बात समझाने के लिए फिल्म '3 Idiots' का उदाहरण भी दिया। उन्होंने फिल्म के एक पात्र का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह वह अपनी महंगी और ब्रांडेड चीजों को अपनी प्रतिष्ठा और बड़प्पन का प्रतीक मानता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के पास महंगे कपड़े, गैजेट या दूसरी सुविधाएं होना अलग बात है, लेकिन उन चीजों को लेकर अहंकार पैदा हो जाना उसके व्यक्तित्व को बदल देता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति को अपने धन, वस्तुओं और स्टेटस पर अत्यधिक अभिमान होने लगता है तो उसकी चाल-ढाल तक बदल जाती है। वह अपने आसपास के लोगों को भी उसी नजर से देखने लगता है।

'एक कटोरी चटनी ने खोल दी अहंकार की पोल'

मुनि श्री ने फिल्म के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उस पात्र की महंगी शेरवानी पर चटनी गिरती है तो उसकी प्रतिक्रिया उसके भीतर छिपे अहंकार को सामने ला देती है। उन्होंने इसी उदाहरण से समझाया कि कई बार व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पास मौजूद महंगी चीजों से नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थिति में उसके व्यवहार से होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन करते हुए पूछा कि क्या हमारे भीतर भी किसी वस्तु, धन, प्रतिष्ठा या स्टेटस को लेकर ऐसा अहंकार तो नहीं है।

क्रोध की जड़ अहंकार को बताया

प्रवचन में मुनि श्री ने क्रोध को लेकर भी श्रद्धालुओं को समझाया। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर क्रोध को शांत करने का उपाय पूछते हैं, लेकिन क्रोध के मूल कारण को समझना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने बताया कि व्यक्ति के अहम भाव को चोट पहुंचने पर क्रोध उत्पन्न होता है। जब किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके पास सब कुछ होते हुए भी उसे महत्व नहीं दिया गया, उसका नाम नहीं लिया गया या उसे पूछा नहीं गया, तो उसके भीतर अहंकार को चोट पहुंचती है। मुनि श्री ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, विनम्रता और अपने भीतर के भावों को पहचानने की प्रेरणा दी।

दिनभर आध्यात्मिक गतिविधियों से ऊर्जा से भरा रहा परिसर

शिविर में शामिल श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। अभिषेक, पूजन, शांतिधारा और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान परिसर भक्तिभाव से भर गया। शिविरार्थियों ने साधना और आत्मचिंतन के माध्यम से अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का अनुभव किया। आयोजन के दौरान अनुशासन और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम का मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला ने किया।

जैन समाज के पदाधिकारी और श्रद्धालु रहे मौजूद

इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के रमेश जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, प्रवीन जैन पद्मावती, शैलेश जैन, मुकेश जैन लले, विवेक जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन, आशीष जैन बाबा, सतेंद्र जैन साहुल, दीपक जैन, रोहित जैन सहित मीडिया प्रभारी राहुल जैन और बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे।

19 सितंबर को उत्तम आर्जव धर्म पर होगा आयोजन

मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि आत्मस्पंदन ध्यान शिविर के तहत 19 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजे निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में मुनि श्री के सानिध्य में उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर अभिषेक, पूजन और विधान का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। आयोजन को लेकर जैन समाज के लोगों में उत्साह बना हुआ है।