आगरा में बुजुर्ग दंपत्ति ने डिजिटल अरेस्ट में 59 लाख तो किसान ने फेक लिंक से एक लाख गंवाए
आगरा। साइबर अपराधी ठगी के नये-नये तरीके ईजाद कर रहे हैं। कोई खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर रहा है, तो कोई व्हाट्सएप पर फेक लिंक भेजकर खातों से रकम उड़ा रहा है। आगरा में ऐसे दो मामले सामने आए हैं। एक मामले में दयालबाग के बुजुर्ग दंपत्ति से 59 लाख रुपए की ठगी हुई तो दूसरा मामला खंदौली क्षेत्र के एक आलू किसान से एक लाख रुपए की साइबर लूट का है। दोनों मामलों की जांच साइबर सेल को सौंपी गई है।
बुजुर्ग दंपत्ति को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 59 लाख रुपये
दयालबाग निवासी डेयरी संचालक अशोक कुमार कपूर और उनकी पत्नी माधुरी कपूर साइबर अपराधियों के शिकार बन गये। एक युवक और युवती ने उन्हें वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट कर 59 लाख रुपये ठग लिए।
माधुरी कपूर ने बताया कि 13 अक्टूबर को उनके फोन पर एक कॉल आया। कॉलर ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर के खिलाफ 2022 से जुड़े सात करोड़ रुपए के अवैध लेनदेन का मामला दर्ज है। उसने धमकाते हुए कहा कि यह केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया है और जांच में सहयोग नहीं किया तो गिरफ्तारी तय है।
कुछ देर बाद एक युवती का फोन आया, जिसने खुद को सीबीआई की अफसर बताया। युवती ने धमकी दी कि अगर उन्होंने सीबीआई के निर्देश नहीं माने तो जेल जाना पड़ेगा और कोई उन्हें बचाने नहीं आएगा। उसने कहा कि एजेंसी उनके घर पर नजर रख रही है, इसलिए वे किसी से बात न करें, न ही घर से बाहर निकलें।
घबराए हुए बुजुर्ग दंपत्ति ने जांच में सहयोग के नाम पर आरोपियों के बताए खातों में पहले 25 लाख और फिर 34 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने यह कहकर उन्हें भरोसा दिलाया कि यह रकम आरबीआई लिंक्ड अकाउंट में जमा कराई जा रही है और जांच पूरी होते ही वापस कर दी जाएगी।
लेकिन जब बार-बार धमकी और नए ट्रांजैक्शन की मांग आने लगी, तब दंपत्ति को शक हुआ। उन्होंने वीडियो कॉल काटी और थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में दर्ज कर जांच साइबर थाना को भेज दी है।
खंदौली क्षेत्र में किसान को फेक लिंक भेज खाते से एक लाख उड़ाए
खंदौली क्षेत्र के खेड़िया गांव निवासी आलू उत्पादक किसान चौधरी दिगंबर सिंह साइबर ठगी के एक और शिकार बने हैं। 20 अक्टूबर को उन्हें एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर शादी का कार्ड भेजा गया, जिसमें एक एपीके फाइल लिंक था। उन्होंने लिंक को डाउनलोड किया, जिसके बाद उनका मोबाइल पूरी तरह हैक हो गया।
पीड़ित ने बताया कि कुछ देर बाद एक महिला का फोन आया, जिसने खुद को बैंक अधिकारी बताया। उसने उनके खाते से अवैध ट्रांजैक्शन का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी। किसान कुछ समझ पाते उससे पहले ही उनके खाते से लगातार रकम कटने लगी। पहले एक रुपये 33 पैसे तीन छोटे ट्रांजैक्शन हुए, फिर 9999 रुपए के दस ट्रांजैक्शन कर 1 लाख से अधिक रकम उड़ा ली गई।
उन्होंने तुरंत बैंक जाकर खाता ब्लॉक कराया और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई न होने से वे चार दिन से थाना और साइबर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि मामला साइबर थाना भेजा गया था, लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने जांच की जानकारी नहीं दी है।
साइबर सेल अधिकारियों के मुताबिक यह ठगी ऒनलाइन ट्रैप और मनी स्कैम के जरिए की गई है, जिसमें लिंक पर क्लिक करते ही हैकर्स मोबाइल की एक्सेस हासिल कर लेते हैं।
साइबर ठगों का बढ़ता नेटवर्क, पुलिस के लिए चुनौती
आगरा में हर हफ्ते औसतन पांच-छह साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर में पीड़ितों को डराकर, धमकाकर या आकर्षक ऑफर देकर फंसाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठग अब मनोवैज्ञानिक तरीकों से लोगों को भ्रमित करते हैं ताकि वे खुद ही अपने बैंक विवरण साझा कर दें।
साइबर थाना प्रभारी का कहना कि दोनों मामलों की जांच जारी है। बैंक खातों की जानकारी आरबीआई और तकनीकी एजेंसियों से मांगी गई है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में डिजिटल सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी अनजान लिंक, कॉल या फाइल को खोलने से पहले जांच जरूर करें।