गैस कटौती पर आगरा के उद्यमियों में उबाल: 80% लिमिट से उद्योगों पर संकट आएगा, नेशनल चैम्बर ने गेल को घेरा

आगरा। गैस आपूर्ति में 6 माह की औसत खपत के 80 प्रतिशत तक प्रतिबंध लगाने के फैसले के खिलाफ आगरा के उद्योग जगत में तीखी नाराजगी सामने आई है। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स के सभागार में अध्यक्ष संजय गोयल की अगुवाई में आयोजित बैठक में गेल गैस के मार्केटिंग डीजीएम मदन मोहन के साथ उद्योगपतियों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया और इसे लघु उद्योगों के लिए घातक निर्णय करार दिया।

Mar 25, 2026 - 19:23
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गैस कटौती पर आगरा के उद्यमियों में उबाल: 80% लिमिट से उद्योगों पर संकट आएगा, नेशनल चैम्बर ने गेल को घेरा
नेशनल चैंबर सभागार में गैस कटौती के मुद्दे पर गेल के मार्केटिंग डीजीएम मदन मोहन के साथ बैठक करते अध्यक्ष संजय गोयल, आगामी निर्वाचित अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल और अन्य पदाधिकारी।

बैठक में स्पष्ट कहा गया कि गैस आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कटौती 6 माह की औसत खपत के आधार पर नहीं, बल्कि दैनिक अनुबंधित मात्रा के आधार पर ही की जानी चाहिए। उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि मौजूदा व्यवस्था न केवल अनुबंध की शर्तों के खिलाफ है, बल्कि इससे अनावश्यक विवाद और आर्थिक नुकसान भी होगा।

गेल गैस प्रकोष्ठ के चेयरमैन मनोज कुमार बंसल ने बताया कि 65 प्रतिशत विनियमन केवल आरएलएनजी आपूर्ति पर लागू होता है, जबकि टीटीजेड के यूपीएम ग्राहकों के लिए 1.1 एमएमएससीएमडी घरेलू गैस आवंटन में कोई कटौती नहीं है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को 6 माह की औसत खपत के 80 प्रतिशत तक सीमित रहने के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जो भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल और आगामी निर्वाचित अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने गेल अधिकारियों को अवगत कराया कि आगरा के अधिकांश फाउंड्री उद्योग लघु श्रेणी के हैं, जिनकी दैनिक गैस खपत लगभग 300 एससीएम (करीब 1 सेमी) है। इन इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया निरंतर नहीं होती, ऐसे में 6 माह की औसत के आधार पर 80 प्रतिशत की सीमा लागू करना सीधे-सीधे उद्योगों को बंदी की ओर धकेलने जैसा है।

उपाध्यक्ष विवेक जैन ने कहा कि वैश्विक युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण पहले ही कच्चे माल और संसाधनों की आपूर्ति प्रभावित है। ऐसे में अतिरिक्त प्रतिबंध उद्योगों के लिए घातक साबित होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीटीजेड में एपीएम गैस का आवंटन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत उद्योगों को बचाने के लिए किया गया था, न कि उन्हें बंद करने के लिए मजबूर करने हेतु।

बैठक में चैम्बर ने गेल गैस के समक्ष कई अहम सुझाव भी रखे। 5000 रुपये प्रतिदिन तक गैस खपत करने वाली इकाइयों पर किसी भी प्रकार की कटौती न की जाए।  गैस कटौती केवल दैनिक अनुबंधित मात्रा के आधार पर ही लागू हो। एपीएम गैस और स्पॉट आरएलएनजी की आपूर्ति पूर्व निर्धारित स्तर तक सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ ही एलसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) नवीनीकरण में बैंकों में आ रही समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाई गई। मनोज कुमार बंसल ने मांग की कि गैस बिल ईमेल के साथ-साथ पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भी भेजे जाएं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

गेल गैस के मार्केटिंग डीजीएम मदन मोहन ने कहा कि वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था भारत सरकार द्वारा जारी गजट के अनुसार लागू की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि चैम्बर द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और सुझावों को उच्च स्तर पर भेजकर उचित कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही एलसी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए बैंकों के साथ संयुक्त बैठक कराने का भरोसा भी दिया।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि चैम्बर का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही नई दिल्ली में पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालेसिस सेल के महानिदेशक पी मनोज कुमार से मुलाकात कर आगरा के उद्योगों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएगा।

बैठक में अध्यक्ष संजय गोयल, उपाध्यक्ष संजय कुमार गोयल, उपाध्यक्ष विवेक जैन, मनोज कुमार बंसल, सुनील सिंघल, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, अमर मित्तल, अशोक कुमार गोयल, राजीव अग्रवाल, नरेन्द्र तनेजा, अभिषेक अग्रवाल, आरएस कपूर, एमपी सिंह, गौरव अग्रवाल, अजय अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल, अमित बंसल, अंकित दौनेरिया, संजय अग्रवाल, योगेन्द्र शर्मा, राकेश सिंघल, हरीश सुन्दरानी, संजय गर्ग, विवेक मित्तल, आकाश अग्रवाल, अनिल कुमार गर्ग, रोहित अग्रवाल, विनीत जैन, शैलेश अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, अनुराग बंसल, अंशुल कौशल, योगेश सिंघल, विनित अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति मौजूद रहे।

SP_Singh AURGURU Editor