टीटीजेड की जकड़ में आगरा का उद्योग, विशेष आर्थिक क्षेत्र घोषित करें, नेशनल चैंबर ने प्री-बजट मेमोरेंडम भेजकर वित्त मंत्री से की बड़ी राहत की मांग

आगरा। आगरा के उद्योगों, व्यापारियों और करदाताओं को लंबे समय से झेलनी पड़ रही टीटीजेड की बंदिशों, बढ़ती लागत और जटिल कर व्यवस्था के बीच नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स, उत्तर प्रदेश, आगरा ने केंद्र सरकार के समक्ष सशक्त आवाज उठाई है। चैम्बर ने प्री-बजट मेमोरेंडम भेजकर माननीय वित्त मंत्री भारत सरकार से आगरा को विशेष आर्थिक क्षेत्र घोषित करने, टीटीजेड में कर वसूली का बोझ न बढ़ाने और करदाताओं को सामाजिक सुरक्षा देने जैसी अहम मांगें रखी हैं।

Jan 16, 2026 - 21:19
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टीटीजेड की जकड़ में आगरा का उद्योग, विशेष आर्थिक क्षेत्र घोषित करें, नेशनल चैंबर ने प्री-बजट मेमोरेंडम भेजकर वित्त मंत्री से की बड़ी राहत की मांग
आगामी बजट को लेकर नेशनल चैंबर सभागार में शुक्रवार को हुई बैठक में मौजूद अध्य़क्ष संजय गोयल, आयकर प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अनिल वर्मा एडवोकेट और अन्य पदाधिकारी।

चैम्बर सभागार में हुई आयकर प्रकोष्ठ की अहम बैठक

चैम्बर सभागार में आयकर प्रकोष्ठ की बैठक चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल की अध्यक्षता में तथा पूर्व अध्यक्ष एवं आयकर प्रकोष्ठ के चेयरमैन अनिल वर्मा के नेतृत्व में सम्पन्न हुई। बैठक में आगामी बजट को लेकर तैयार प्री-बजट मेमोरेंडम पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसे बाद में माननीय वित्त मंत्री, भारत सरकार को प्रेषित किया गया।

बैठक में बताया गया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 1995 में ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) घोषित किए जाने के बाद से आगरा का औद्योगिक विकास बुरी तरह प्रभावित हुआ है। टीटीजेड की शर्तों के कारण न तो उद्योगों का विस्तार हो पा रहा है और न ही नए उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे आगरा औद्योगिक दृष्टि से पिछड़ता चला गया है।

टीटीजेड में कर टारगेट न बढ़ाने की मांग

चैम्बर ने स्पष्ट रूप से आग्रह किया कि टीटीजेड क्षेत्र में आयकर और जीएसटी के कलेक्शन टारगेट में वृद्धि न की जाए। अध्यक्ष संजय गोयल और चेयरमैन अनिल वर्मा ने कहा कि टीटीजेड की बंदिशों के कारण उद्योगों को कच्चा माल बाहर से मंगाना पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है और प्रतिस्पर्धा में आगरा पिछड़ जाता है।

आगरा को स्पेशल इकनोमिक जोन घोषित करने की पुरजोर अपील

चैम्बर ने माननीय वित्त मंत्री से आगरा को स्पेशल इकनोमिक जोन घोषित करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि आगरा को यह दर्जा मिलता है तो उद्योगों की लागत घटेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आगरा दोबारा औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

आयकरदाताओं को सोशल सिक्यूरिटी और अपील की समय-सीमा तय करने की मांग

बैठक में आयकरदाताओं को सोशल सिक्यूरिटी प्रदान किए जाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, फेसलेस अपील प्रणाली में आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर चिंता जताते हुए कहा गया कि अपीलों के निपटारे के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय होनी चाहिए और निर्णय लेते समय संबंधित अधिकारियों द्वारा सभी जवाबों और दस्तावेजों पर समुचित विचार किया जाना चाहिए।

नई कर प्रणाली को सरल बनाने के सुझाव

चर्चा के दौरान नई कर प्रणाली को और अधिक सरल एवं व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता बताई गई। प्रमुख सुझावों में सैलरी क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन एक लाख रुपये किया जाए। आवास ऋण पर ब्याज की छूट वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ाई जाए। एनपीएस में कर छूट प्रदान की जाए। वरिष्ठ नागरिकों को एफडी की ब्याज पर विशेष छूट दी जाए।

सीए और अधिवक्ताओं ने रखे तकनीकी सुझाव

सीए प्रार्थना जालान और अधिवक्ता राजकिशोर खंडेलवाल ने सुझाव दिया कि अस्पताल में होने वाले खर्चों को दो लाख रुपये की नकद भुगतान सीमा से बाहर रखा जाए। साथ ही, पार्टनरशिप फर्म पर टैक्स रेट कंपनियों के समान की जाए और पार्टनर पर टीडीएस से जुड़े नए प्रावधानों की समीक्षा की जाए।

बैठक में ये प्रमुख लोग रहे उपस्थित

बैठक में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल, पूर्व अध्यक्ष एवं आयकर प्रकोष्ठ चेयरमैन अनिल वर्मा, कोषाध्यक्ष संजय अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल, सदस्य दीपक महेश्वरी, प्रार्थना जालान, सुनील गोयल, राजकिशोर खंडेलवाल, अनूप गोयल, अवनीश कौशल और राजकुमार भगत उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor