आगरा में एआई क्रांति की दस्तक: विवि-चैंबर संग मिलकर औद्योगिक अनुसंधान केंद्र का प्रस्ताव
आगरा। नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स द्वारा आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ व्यापार में क्रांति विषयक सेमिनार में एआई की उपयोगिता, भविष्य और चुनौतियों पर व्यापक विमर्श हुआ। कार्यक्रम में आगरा में आईबीएम औद्योगिक अनुसंधान केंद्र खोलने का प्रस्ताव भी सामने आया, जिससे शहर के युवाओं को नए अवसर मिल सकें और प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सके।
संजय प्लेस स्थित होटल फेयरफील्ड में बिजनेस रिवॊल्यूशन विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषयक सेमिनार की अध्यक्षता चैंबर अध्यक्ष संजय गोयल ने की, जबकि संचालन एजुकेशन एवं टेक्सटाइल्स प्रकोष्ठ के चेयरमैन सचिन सारस्वत ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (डीबीआरएयू) की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी मौजूद रहीं, जबकि मुख्य वक्ता आईबीएम मुंबई से श्री पीयूष अग्निहोत्री थे।
एआई से ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है व्यापार- पीयूष अग्निहोत्री
मुख्य वक्ता पीयूष अग्निहोत्री ने कहा कि एआई कोई नई सोच नहीं है बल्कि 1940 से ही क्रियान्वित है। उन्होंने बताया कि एआई एक दोस्त है जो सुनेगा और सही सलाह देगा। उद्योग की शुरुआत से लेकर सफलता तक एआई सहायक है। एआई का प्रयोग प्रोडक्शन, इनोवेशन, मार्केटिंग, सेल्स, पर्चेज, मैनेजमेंट और एचआर में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज एआई हर सेक्टर में प्रयुक्त हो रही है और यह उद्यमियों व छात्रों दोनों के लिए उपयोगी है। जनरेटिव एआई के माध्यम से उद्योग की पीपीटी से लेकर मार्केट एनालिसिस तक सब संभव है।
उन्होंने आगाह किया कि इसके फायदे और नुकसान दोनों हैं, परंतु उचित उपयोग से किसी भी व्यापार को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।
आगरा में आईबीएम औद्योगिक अनुसंधान केंद्र का प्रस्ताव
नेशनल चैंबर के पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने आगरा में तेजी से हो रहे ब्रेन ड्रेन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहर में औद्योगिक अनुसंधान केंद्र की स्थापना होनी चाहिए ताकि स्थानीय युवाओं को अवसर मिल सके।
मुख्य वक्ता पीयूष अग्निहोत्री ने इस सुझाव से सहमति जताई। इस पर चैंबर ने घोषणा की कि शीघ्र ही डीबीआरएयू और आईबीएम मुंबई के सहयोग से आगरा में औद्योगिक अनुसंधान शोध केंद्र खोलने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
एआई से जुड़कर आगरा में ही अच्छी कमाई कर सकते हैं युवा- कुलपति
डॊ. आंबेडकर विवि की कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि आगरा की स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज पर एआई का प्रयोग करके उन्हें लोकल से ग्लोबल स्तर तक ले जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अगर बाहर जाने के बजाय आगरा में एआई से जुड़े उद्योगों में काम करें, तो वे 25 से 60 हजार रुपये प्रतिमाह तक कमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई कमजोर उद्योगों को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम है। हमें प्रधानमंत्री जी के 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में अपना योगदान देना चाहिए।
सेमिनार में उल्लेखनीय उपस्थिति
इस अवसर पर मयंक मित्तल, नीरज अग्रवाल, सिद्धार्थ गोयल, शलिनी यादव, नवी गुप्ता, रीमझीम जैन, यश गर्ग, शिवानी, शैलेष अग्रवाल, मोहम्मद अदान, विनोद कुमार सिंह, परम अग्रवाल, विवेक मंगल, डॉ. गुंजन भटनागर, डॉ. अभिलाषा सिंह, डॉ. शांतनु कुमार साहू, डॉ. प्रज्ञा, हरिओम तिवारी, शिवम कुमार, नितेश सिंह, चारुष तनेजा, हरीश सुन्दरानी, दिव्यांशु सिंह, पूर्वा शेखावत, आदित्य भदौरिया, दीपक गोयल, अभिषेक गोयल, रितिक सिंह, मोहन मनचंदा, अरमान सैनी, श्रेया दुबे, सिमरन, कशिश, वंदना, अंजु सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, छात्र व उद्यमी उपस्थित रहे।