बसपा की सियासत में आकाश की वापसी: दलित राजनीति के लिए मायावती का संतुलन साधने वाला दांव

बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद की धमाकेदार वापसी से यह संकेत स्पष्ट है कि मायावती अब चाहती हैं कि बसपा फिर से राष्ट्रीय मंच पर युवा नेतृत्व के साथ खड़ी हो। हालांकि उत्तराधिकार अभी भी अधर में है, लेकिन आकाश को मिली भूमिका यह जरूर दर्शाती है कि मायावती अब विकल्पों की बजाय परिणामों पर ध्यान दे रही हैं।

May 18, 2025 - 18:02
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बसपा की सियासत में आकाश की वापसी: दलित राजनीति के लिए मायावती का संतुलन साधने वाला दांव

लखनऊ। पहले फरवरी में निष्कासन, फिर अप्रैल में माफीनामे के बाद वापसी और अब मई में ज़ोरदार सियासी धमाका। यह किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद की असली राजनीतिक यात्रा है। अपने श्वसुर की वजह से परिवार में असहज स्थिति का सामना करने वाले आकाश अब एक बार फिर बसपा की मुख्य भूमिका में लौट आए हैं।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को प्रेस नोट जारी कर आकाश आनंद को पार्टी का चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए जाने की घोषणा की। साथ ही उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव के लिए स्टार प्रचारक भी बनाया गया है। इससे साफ है कि बसपा अब एक बार फिर आकाश को संगठन के फ्रंट फुट पर लाकर युवा राजनीति और दलित नेतृत्व को केंद्र में लाने का प्रयास कर रही है।

बसपा में पहली बार नया पद: सभी नेशनल कोऑर्डिनेटरों से ऊपर होंगे आकाश

गौरतलब है कि अभी तक बसपा में केवल नेशनल कोऑर्डिनेटर का ही पद हुआ करता था, लेकिन इस बार मायावती ने आकाश के लिए चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर का नया पद सृजित किया है, जो दर्शाता है कि वह अब पार्टी में सभी समकक्ष पदधारकों के ऊपर होंगे और सीधी रिपोर्टिंग बसपा सुप्रीमो को ही करेंगे।

मायावती की नसीहत- सावधानी के साथ पार्टी मजबूत करें

बसपा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मायावती ने कहा, पार्टी के लोगों की सहमति से आकाश आनंद को पार्टी का मुख्य नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। उन्हें देशभर में पार्टी के कार्यक्रमों की जिम्मेदारी भी दी जा रही है। साथ ही उन्होंने आकाश को नसीहत देते हुए कहा कि उम्मीद है कि इस बार वह पार्टी व मूवमेंट के हित में हर प्रकार की सावधानी बरतते हुए पार्टी को मजबूत बनाने में सराहनीय योगदान देंगे।

बिहार चुनाव अकेले लड़ने का एलान

प्रेस नोट में यह भी स्पष्ट किया गया कि बसपा इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को अकेले लड़ेगी। पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे को दुरुस्त करने की दिशा में कदम उठाते हुए बहुजन वालंटियर फोर्स को फिर से संगठित करने का भी फैसला लिया है।

वापसी से पहले निष्कासन और माफी की पृष्ठभूमि

यह ध्यान देने वाली बात है कि मायावती ने हाल के वर्षों में दो बार आकाश को पद से हटाकर सख्त संदेश दिया था। पिछली बार तो उन्होंने आकाश को संभावित उत्तराधिकारी के पद से भी हटा दिया था और स्पष्ट किया था कि अब वह अपने जीते जी किसी को उत्तराधिकारी घोषित नहीं करेंगी। इस बार आकाश को दोबारा जिम्मेदारी तो सौंपी गई है, लेकिन उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया गया है।

चंद्रशेखर की चुनौती से निपटने का प्रयास

दलित राजनीति में आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद धीरे-धीरे ही सही, लेकिन बसपा नेतृत्व के लिए चिंताएं पैदा कर रहे हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि मायावती ने आकाश की वापसी को रणनीतिक संतुलन के रूप में चुना है। दलित युवाओं के बीच चंद्रशेखर की पकड़ को जवाब देने के लिए युवा चेहरा आकाश आनंद को सामने लाना एक प्रतिक्रियात्मक रणनीति मानी जा रही है।

SP_Singh AURGURU Editor