दिल्ली ब्लास्ट के बाद सामने आ रहे अल-फलाह के रहस्य: संस्थापक जावेद सिद्दीकी पर जांच की आंच

नई दिल्ली। दिल्ली में लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के चर्चा में आई फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मैनेजिंग ट्रस्टी और संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी भी अपने व्यापक कॉरपोरेट नेटवर्क और एक पुराने आपराधिक मामले को लेकर जांच के घेरे में आ गये हैं। जावेद अहमद सिद्दीकी का संबंध महू (मध्य प्रदेश) से है।

Nov 13, 2025 - 15:23
 0
दिल्ली ब्लास्ट के बाद सामने आ रहे अल-फलाह के रहस्य: संस्थापक जावेद सिद्दीकी पर जांच की आंच
फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मैनेजिंग ट्रस्टी और संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी.

नई दिल्ली। दिल्ली में लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के चर्चा में आई फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मैनेजिंग ट्रस्टी और संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी भी अपने व्यापक कॉरपोरेट नेटवर्क और एक पुराने आपराधिक मामले को लेकर जांच के घेरे में आ गये हैं। जावेद अहमद सिद्दीकी का संबंध महू (मध्य प्रदेश) से है।

जावेद अहमद सिद्दीकी की नौ कंपनियां अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ी हुई हैं। वही संस्था है जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी का भी संचालन करती है। जावेद अहमद सिद्दीकी शिक्षा, सॉफ्टवेयर, निवेश और ऊर्जा से संबंधित कंपनियों में डायरेक्टर की भूमिका में हैं। इनमें से अधिकांश कंपनियों का पंजीकृत पता एक ही है । ये है- 274-A, अल-फलाह हाउस, जामिया नगर, ओखला, नई दिल्ली, जो अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट का कार्यालय भी है।

सिद्दीकी के अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ी जिन कंपनियों के नाम सामने आ चुके हैं, वे हैं- अल-फलाह डेवलपर्स प्रा. लि., अल-फलाह मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन, अल-फलाह इंडस्ट्रियल रिसर्च फाउंडेशन, अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्रा. लि., एमजेएच डेवलपर्स प्रा. लि. अल-फलाह इन्वेस्टमेंट (उनका सबसे पुराना उपक्रम, 1992 से), अल-फलाह सॉफ्टवेयर प्रा. लि., अल-फलाह एनर्जी प्रा. लि. तर्बिया एजुकेशन फाउंडेशन। इनमें से अधिकतर कंपनियां 2019 तक सक्रिय रहीं।

साल 2000 में नई फ्रेंड्स कॉलोनी थाना, दिल्ली में एफआईआर संख्या 43/2000 दर्ज की गई थी। आरोपियों में जावेद अहमद सिद्दीकी और उनके सहयोगी जावेद अहमद शामिल थे। ये आरोप धारा 420 – धोखाधड़ी, धारा 406 व 409 – आपराधिक विश्वासघात, धारा 471 – जाली दस्तावेज़ों का उपयोग और धारा 120बी – आपराधिक साजिश के तहत थे। 

मामले में आरोप था कि सिद्दीकी और उनके साथियों ने फर्जी निवेश योजनाएं बनाकर लोगों से धन जमा कराया, जो बाद में उनकी कंपनियों में फर्जी शेयरों में परिवर्तित कर दिया गया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अल-फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और डायरेक्टर सऊद अहमद सिद्दीकी की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। दोनों आरोपी 7.5 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में तीन साल से अधिक समय तक जेल में रहे। आरोपियों पर यह भी आरोप था कि उन्होंने निवेशकों से जमा धन नकली कंपनियों के माध्यम से वसूला और बाद में उसे अपने निजी खातों में स्थानांतरित कर दिया। कई मामलों में जाली दस्तावेजों का उपयोग करके शेयरों का रूप दिया गया।
अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, जिसकी अध्यक्षता जावेद अहमद सिद्दीकी करते हैं,
अल-फलाह यूनिवर्सिटी और अल-फलाह मेडिकल रिसर्च सेंटर, फरीदाबाद का संचालन करता है। यह विश्वविद्यालय 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में शुरू हुआ था और अब 78 एकड़ के परिसर में विस्तारित है।