पीएम मोदी के जन्मदिन पर 125 टीबी मरीजों को गोद लेगा आंबेडकर विश्वविद्यालय, मिलेगी पोषण पोटली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा 125 टीबी मरीजों को गोद लेगा। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने कुलपति प्रो. आशु रानी को मरीजों की सूची सौंपी है। विश्वविद्यालय की ओर से मरीजों को उपचार अवधि में पौष्टिक खाद्य सामग्री से युक्त पोषण पोटली उपलब्ध कराई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी उपचार के दौरान नियमित दवा के साथ पर्याप्त पोषण बेहद जरूरी है। निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।
टीबी मरीजों के उपचार के साथ पोषण पर भी जोर, जिला क्षय रोग अधिकारी ने कुलपति प्रो. आशु रानी को सौंपी मरीजों की सूची
आगरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में टीबी मरीजों की मदद के लिए विशेष पहल की जाएगी। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की ओर से जिले के 125 टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके उपचार की अवधि में पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
इसी क्रम में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी को 125 टीबी मरीजों की सूची सौंपी। इस दौरान उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. शशिकांत राहुल भी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय द्वारा मरीजों को गोद लेने के बाद उन्हें उपचार अवधि में पौष्टिक खाद्य सामग्री से युक्त पोषण पोटली उपलब्ध कराई जाएगी।
छह माह तक चलता है टीबी का उपचार
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि टीबी मरीज को पूरी तरह स्वस्थ होने में सामान्य तौर पर करीब छह माह का समय लग सकता है। इस दौरान मरीज के लिए नियमित रूप से टीबी की दवा लेना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण पर्याप्त और पौष्टिक आहार लेना भी है। उन्होंने बताया कि बीमारी के दौरान शरीर कमजोर हो सकता है। ऐसे में पर्याप्त पोषण मिलने से मरीज की शारीरिक क्षमता बनाए रखने और उपचार के दौरान स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। दवा के साथ संतुलित आहार को टीबी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
निक्षय पोषण योजना से हर माह मिल रहे 1000 रुपये
टीबी मरीजों को पोषण संबंधी परेशानी न हो, इसके लिए सरकार की ओर से निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। योजना के तहत पात्र टीबी मरीजों को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस आर्थिक सहायता का उद्देश्य मरीजों को उपचार के दौरान पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में सहयोग देना है, ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनके खानपान पर प्रतिकूल असर न पड़े और वे नियमित रूप से अपना उपचार जारी रख सकें।
राज्यपाल के आह्वान पर गोद लेने का अभियान
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि प्रदेश की कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के आह्वान पर टीबी मरीजों को गोद लेने की पहल भी लगातार चल रही है। सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संगठन और अन्य लोग आगे आकर मरीजों को गोद ले रहे हैं। गोद लेने वाले लोग मरीज की उपचार अवधि के दौरान प्रत्येक माह उन्हें पोषण पोटली उपलब्ध कराने में सहयोग करते हैं। इसका उद्देश्य केवल दवा तक सीमित न रहकर टीबी मरीजों की समग्र देखभाल और पोषण संबंधी जरूरतों को भी पूरा करना है।
125 मरीजों के लिए विश्वविद्यालय की पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय द्वारा 125 क्षय रोगियों को गोद लेने का निर्णय इसी अभियान की कड़ी माना जा रहा है। इसके तहत मरीजों को उपचार अवधि में नियमित रूप से पोषण पोटली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। पोषण पोटली में पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराए जाने से मरीजों को बीमारी के दौरान जरूरी पोषण मिल सकेगा। इससे कमजोरी कम करने, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने और उपचार के दौरान स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दवा के साथ पोषण भी जरूरी
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीबी से जंग केवल दवाओं के सहारे नहीं, बल्कि बेहतर पोषण और नियमित उपचार के साथ लड़ी जाती है। मरीज यदि चिकित्सकों की सलाह के अनुसार नियमित दवा लेते हैं और पर्याप्त पौष्टिक भोजन करते हैं तो उनके स्वास्थ्य में सुधार की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है। विश्वविद्यालय की यह पहल टीबी मरीजों को उपचार के दौरान सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी पोषण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।