खाकी पर फिर दाग, दूध बेचने वाले युवक को थर्ड डिग्री, नाखून उखाड़े जाने का आरोप, दरोगा निलंबित
आगरा। कानून के रक्षक जब ही कानून तोड़ने लगें, तो आम आदमी की पीड़ा सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहती, वह आत्मा तक को झकझोर देती है। जीवनी मंडी चौकी से सामने आया मामला न केवल पुलिसिया क्रूरता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी कठघरे में खड़ा करता है।
गलती सिर्फ इतनी थी कि टेंपो चलाना नहीं आता था, मानवता को झकझोर देने वाला मामला जीवनी मंडी चौकी में
आगरा। कानून के रक्षक जब ही कानून तोड़ने लगें, तो आम आदमी की पीड़ा सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहती, वह आत्मा तक को झकझोर देती है। जीवनी मंडी चौकी से सामने आया मामला न केवल पुलिसिया क्रूरता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी कठघरे में खड़ा करता है।
सैंया क्षेत्र के गांव वीरई निवासी नरेंद्र कुशवाह, जो रोज़ की तरह अपने भाई के साथ टेंपो से दूध सप्लाई करने आगरा आया था, शायद यह नहीं जानता था कि उसकी एक छोटी-सी मजबूरी उसे थाने की अमानवीय यातना तक पहुंचा देगी। नरेंद्र का कसूर सिर्फ इतना था कि वह टेंपो चलाना नहीं जानता था और भाई के लौटने तक उसमें बैठा इंतजार कर रहा था।
शनिवार को गरीब नगर, जीवनी मंडी क्षेत्र में टेंपो खड़ा था। भाई धीरज कुशवाह दूध देने गली में गया हुआ था। इसी दौरान इलाके में किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। सूचना पर जीवनी मंडी चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ लोगों को पकड़कर चौकी ले जाने के लिए पुलिस ने टेंपो से चलने को कहा। नरेंद्र ने साफ कहा कि उसे टेंपो चलाना नहीं आता।
आरोप है कि बस यही बात पुलिसकर्मियों को नागवार गुज़री। गुस्से में दरोगा ने नरेंद्र को थप्पड़ मार दिया और जबरन चौकी ले आया। इसके बाद जो हुआ, वह किसी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। पीड़ित के अनुसार चौकी में उसे बेरहमी से पीटा गया, पैरों के तलवों पर डंडे मारे गए और उसके पैर के अंगूठे का नाखून तक उखाड़ दिया गया।
यातना यहीं नहीं रुकी। नरेंद्र का टेंपो सीज कर दिया गया, जेब में रखे 1800 रुपये और मोबाइल फोन छीन लिए गए और शांतिभंग की धाराओं में उसका चालान कर दिया गया। पुलिस की पिटाई के चलते उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है।
भाई धीरज ने यह बात अपने परिचित रिश्तेदार और भाजपा नेता प्रेम सिंह कुशवाह को बताई। उनके हस्तक्षेप से नरेंद्र की जमानत तो हो गई, लेकिन पीड़ा यहीं खत्म नहीं हुई। आरोप है कि जब वे थाने से मोबाइल और रुपये लेने गए तो पुलिस ने उन्हें वापस नहीं किया।
इसके बाद पीड़ित नरेंद्र अपने रिश्तेदारों के साथ डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास के पास पहुंचा और पूरी आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को समझते हुए डीसीपी सिटी ने तत्काल कार्रवाई की और जीवनी मंडी चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार को निलंबित कर दिया। उनकी जगह गौरव राठी को नया चौकी प्रभारी नियुक्त किया गया है। साथ ही अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
आज नरेंद्र शारीरिक दर्द के साथ-साथ मानसिक भय में भी जी रहा है। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है, क्या गरीब और कमजोर आदमी के लिए इंसाफ इतना ही कठिन है? और क्या वर्दी की ताकत मानवीय संवेदनाओं से ऊपर हो गई है?