ताजनगरी में दुनिया भर के वास्तुविदों का जमावड़ा, 23वां आर्कएशिया फोरम शुरू, 24 एशियाई देशों के 600 से अधिक प्रतिनिधि, वास्तुकार, शिक्षाविद, विद्यार्थी और विशेषज्ञ शामिल

ताजनगरी में 23वें आर्कएशिया फोरम के तहत 24 एशियाई देशों के 600 से अधिक वास्तु विशेषज्ञ जुटे हैं। पांच दिवसीय आयोजन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला और विरासत को आधुनिक, टिकाऊ निर्माण से जोड़ने पर मंथन होगा। 11-12 सितंबर को जयपुर में ओपन फोरम में ढाई हजार से अधिक आर्किटेक्ट्स शामिल होंगे।

Sep 8, 2026 - 16:53
 0
ताजनगरी में दुनिया भर के वास्तुविदों का जमावड़ा, 23वां आर्कएशिया फोरम शुरू, 24 एशियाई देशों के 600 से अधिक प्रतिनिधि, वास्तुकार, शिक्षाविद, विद्यार्थी और विशेषज्ञ शामिल
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट्स द्वारा जेपी पैलेस में आयोजित आर्क एशिया फोरम के शुभारंभ पर एशियाई देशों के प्रतिनिधि आर्किटेक्ट्स को संबोधित करतेआर्कएशिया के प्रेसिडेंट बूजियांग। साथ हैं नेशनल प्रेसिडेंट विलास वसंत अवचत, कन्वीनर तुषार सोगानी, आईआईए- आगरा चैप्टर के अध्यक्ष समीर गुप्ता एवं अन्य।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट्स द्वारा जेपी पैलेस में आयोजित आर्क एशिया फोरम के शुभारंभ पर पत्रकारों को संबोधित करते आर्कएशिया के प्रेसिडेंट बूजियांग। साथ हैं नेशनल प्रेसिडेंट विलास वसंत अवचत और कन्वीनर तुषार सोगानी।

आगरा। ताजनगरी में मंगलवार से 23वें आर्कएशिया फोरम के साथ दुनिया भर के वास्तुविदों का पांच दिवसीय महामंथन शुरू हो गया। फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी पैलेस में आयोजित फोरम के पहले चरण में 24 एशियाई देशों के 600 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, भारतीय वास्तुकार, शिक्षाविद, विद्यार्थी और विशेषज्ञ शामिल हुए। आगरा में कमेटी और काउंसिल की बैठकों के बाद 11 और 12 सितंबर को जयपुर में ओपन फोरम होगा, जिसमें देश-दुनिया के ढाई हजार से अधिक आर्किटेक्ट्स के शामिल होने की संभावना है।

वर्नाक्युलर विजडम को आधुनिक वास्तुकला से जोड़ने पर जोर

द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स के तत्वावधान में हो रहे इस फोरम की थीम ‘ब्रिंगिंग बैक वर्नाक्युलर विजडम’ रखी गई है। कन्वीनर आर्किटेक्ट तुषार सोगानी (जयपुर) ने कहा कि भारतीय वास्तु विरासत को दुनिया के आर्किटेक्ट्स के सामने प्रस्तुत करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। भारत की स्थानीय वास्तु बुद्धिमत्ता, ऐतिहासिक विरासत और अनूठी स्थापत्य कला को आधुनिक डिजाइन और भवन निर्माण में शामिल करना आज दुनिया की जरूरत है। इससे यह संदेश भी जाएगा कि वास्तुकला के क्षेत्र में भारत की परंपराएं सशक्त और टिकाऊ रही हैं।

भारत की विरासत से सीखने का स्वर्णिम अवसर

आर्कएशिया के प्रेसिडेंट बूजियांग (चीन) ने कहा कि विज्ञान और नई तकनीक ने भवन निर्माण के क्षेत्र में काफी प्रगति की है, लेकिन अपनी विरासत से सीखना आज भी जरूरी है। पारंपरिक वास्तु ज्ञान आधुनिक निर्माण की चुनौतियों का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यह फोरम एशियाई वास्तुविदों के लिए तकनीकी और वैचारिक साझेदारी के साथ भारत की विरासत से सीखने का स्वर्णिम अवसर है।

ताजमहल की वास्तुकला ने विदेशी विशेषज्ञों को किया प्रभावित

आईआईए के नेशनल प्रेसिडेंट आर्किटेक्ट विलास वसंत अवचत (मुंबई) ने कहा कि फोरम के पहले दिन विभिन्न देशों से आए आर्किटेक्ट्स ने ताजमहल का भ्रमण किया और उसकी वास्तुकला से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से दुनिया को भारतीय प्राचीन वास्तु विरासत को आधुनिक ढांचे में समाहित करने की कला सीखने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स प्रोफेशनल और एजुकेशनल साझेदारी का वैश्विक मंच है। संगठन से भारत के 35 हजार आर्किटेक्ट्स सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं।

400-500 साल पुरानी इमारतों से सीखने की जरूरत

आईआईए आगरा सेंटर के प्रेसिडेंट आर्किटेक्ट समीर गुप्ता विभव ने कहा कि ‘ब्रिंगिंग बैक वर्नाक्युलर विजडम’ जैसे विषय पर वैचारिक साझेदारी के लिए आगरा से बेहतर जगह नहीं हो सकती। आगरा में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे तीन यूनेस्को विश्व धरोहर स्मारक हैं। इनकी वास्तुकला में स्थानीय जलवायु और पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है।

उन्होंने कहा कि आज की इमारतें दो-तीन वर्ष में ही बीमार होने लगती हैं और उनमें लीकेज की समस्या आ जाती है, जबकि 400-500 वर्ष पुरानी हमारी विश्व धरोहर इमारतों में सीलन तक का निशान नहीं मिलता। इन धरोहरों की निर्माण तकनीक और वास्तु ज्ञान से आधुनिक वास्तुकला को सीखने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि फोरम के माध्यम से देश-दुनिया के हजारों आर्किटेक्ट्स को भारतीय वास्तु परंपरा को वर्तमान आर्किटेक्चर में इस्तेमाल करने की सीख मिलेगी।

पांच सभागारों में दिनभर चला मंथन

फोरम के पहले दिन होटल जेपी पैलेस के पांच अलग-अलग सभागारों में ऑनलाइन और ऑफलाइन बैठकें सुबह से शाम तक चलती रहीं। यंग आर्किटेक्ट्स, सस्टेनेबल आर्किटेक्चर, आर्किटेक्चर एजुकेशन, सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रोफेशनल प्रैक्टिस जैसे विषयों पर आर्कएशिया कमेटी की बैठकें हुईं। इस दौरान आईआईए-यूपी चैप्टर के अध्यक्ष संदीप सारस्वत (लखनऊ) भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

परंपरा और आधुनिकता के बीच संवाद

फोरम में स्थानीय जलवायु के अनुरूप डिजाइन, प्राकृतिक निर्माण सामग्री, पारंपरिक शिल्प एवं निर्माण तकनीक, पारंपरिक भवन-रूपों की पुनर्व्याख्या, वर्नाक्युलर वास्तुकला से सीख, संस्कृति एवं स्थान, शहरी डिजाइन में पहचान और डिजाइन शिक्षा के पुनर्विचार जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

आर्कएशिया के प्रमुख लक्ष्यों में टिकाऊ वास्तुकला को बढ़ावा देना, एशियाई वास्तुकारों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ाना, नवीन वास्तु तकनीकों के अनुकूलन के अवसर उपलब्ध कराना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करना तथा एशिया की विविध वास्तु परंपराओं का संरक्षण और आधुनिक संदर्भ में विकास शामिल है।

रिकेन यामामोटो होंगे प्रमुख वक्ताओं में

फोरम के प्रमुख आकर्षणों में जापान के प्रसिद्ध वास्तुकार और 2024 प्रित्जकर आर्किटेक्चर प्राइज विजेता रिकेन यामामोटो का मुख्य वक्तव्य शामिल है। उनका सत्र ‘वर्नाक्युलर ऐज ए सिस्टम, नॉट ए स्टाइल’ विषय पर केंद्रित होगा। इसके अलावा भारत सहित एशिया के विभिन्न देशों के वास्तु और डिजाइन विशेषज्ञ तकनीकी एवं मास्टर सत्रों में हिस्सा लेंगे।

जयपुर में ढाई हजार आर्किटेक्ट्स का जुटान

आर्कएशिया फोरम का अगला महत्वपूर्ण चरण 11 और 12 सितंबर को जयपुर में आयोजित ओपन फोरम होगा। यहां देश-दुनिया के ढाई हजार से अधिक आर्किटेक्ट्स के जुटने की उम्मीद है। ओपन फोरम में मिट्टी, पत्थर, बांस और चूने जैसी प्राकृतिक निर्माण सामग्री, शिल्प और संरचना, पारंपरिक भवन शैलियों की पुनर्व्याख्या, गर्मी-हवा-छाया के अनुरूप भवन डिजाइन, डिजाइन शिक्षा और शहरी पहचान जैसे विषयों पर विमर्श होगा।

ओपन फोरम के प्रमुख विषय

ओपन फोरम में ‘मिट्टी, पत्थर, बांस, चूना : नई भौतिक बुद्धिमत्ता’, ‘जो हाथ बनाते हैं : शिल्प, संरचना, बारीकी और पहचान के रूप में’, ‘आंगन से समुदाय तक : नए जीवन के लिए पुरानी शैलियां’, ‘गर्मी, हवा, छाया : सांस लेती इमारतों का डिजाइन’, ‘जमीन से सीखना : डिजाइन शिक्षा को अधिक यथार्थपरक बनाना’ और ‘आत्मा से भरी गलियां : मुखौटों से परे शहरी पहचान’ जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

SP_Singh AURGURU Editor