राज्यसभा चुनाव में यूपी का गणित: भाजपा-एनडीए के खाते में सात सीटों का आधार, आठवीं के लिए चाहिए अतिरिक्त वोट; सपा के सामने दो सीटों का आंकड़ा

यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में मौजूदा विधानसभा गणित भाजपा-एनडीए को सात सीटों के लिए पर्याप्त आधार देता है, जबकि आठवीं सीट के लिए करीब पांच अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे। सपा के 101 और कांग्रेस के दो विधायकों के आधार पर विपक्षी खेमे के लिए दो सीटों का गणित बनता है। भाजपा और सपा ने अभी उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं, इसलिए पुराने सदस्यों की वापसी या नए चेहरों को मौका देने पर अंतिम फैसला बाकी है। असली पेच 10वीं सीट और अतिरिक्त वोटों को लेकर रहेगा।

Sep 22, 2026 - 21:58
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राज्यसभा चुनाव में यूपी का गणित: भाजपा-एनडीए के खाते में सात सीटों का आधार, आठवीं के लिए चाहिए अतिरिक्त वोट; सपा के सामने दो सीटों का आंकड़ा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाला चुनाव अगले साल के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी ताकत का अहम परीक्षण होगा। चुनाव आयोग ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख होगी और 16 अक्टूबर को मतदान के बाद शाम पांच बजे से मतगणना होगी। इन 10 सीटों में फिलहाल आठ भाजपा, एक सपा और एक बसपा के पास है।

राज्यसभा चुनाव में जनता सीधे मतदान नहीं करती। निर्वाचित विधायक वोट देते हैं और आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के तहत उम्मीदवारों का चुनाव होता है। यूपी विधानसभा की 403 सीटों में फिलहाल छह सीटें रिक्त हैं, इसलिए प्रभावी संख्या 397 है। मौजूदा गणित में एक राज्यसभा सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत पड़ रही है।

भाजपा-एनडीए का गणित क्या कहता है

भाजपा के पास 256 विधायक हैं। उसके सहयोगियों में अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक हैं। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायकों का समर्थन भी एनडीए के साथ माना जा रहा है। इस तरह भाजपा नेतृत्व वाले खेमे की संख्या करीब 291 तक पहुंचती है।

एक उम्मीदवार के लिए 37 वोट चाहिए। इस हिसाब से सात उम्मीदवारों के लिए 259 वोट पर्याप्त होंगे। यानी सात सीटों के बाद भी एनडीए के पास करीब 32 वोट बच सकते हैं। इसलिए मौजूदा संख्या के आधार पर भाजपा-एनडीए के सात उम्मीदवारों के लिए आवश्यक वोट जुटाना संभव है।

लेकिन आठवीं सीट का गणित अलग है। आठ उम्मीदवारों के लिए 296 वोट चाहिए, जबकि एनडीए के पास करीब 291 वोट हैं। यानी आठवीं सीट के लिए कम से कम पांच अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। ये वोट विपक्षी खेमे में क्रॉस वोटिंग, निर्दलीय या अन्य विधायकों के समर्थन अथवा चुनाव के दौरान बदलने वाले राजनीतिक समीकरणों से आ सकते हैं। 2024 के राज्यसभा चुनाव में यूपी में क्रॉस वोटिंग का उदाहरण भी सामने आया था।

सपा के पास दो सीटों का स्पष्ट गणित

समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं और कांग्रेस के दो विधायक हैं। दो राज्यसभा सीटों के लिए 74 वोट चाहिए। इसलिए मौजूदा संख्या के आधार पर सपा के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या है। दो सीटों के लिए आवश्यक 74 वोट निकालने के बाद भी सपा के पास अतिरिक्त वोट बचेंगे।

यही वजह है कि मौजूदा विधानसभा गणित में सात सीटों का आधार भाजपा-एनडीए और दो सीटों का आधार सपा के पास दिखाई देता है। इसके बाद बचने वाली 10वीं सीट के लिए अतिरिक्त वोट सबसे महत्वपूर्ण होंगे। भाजपा-एनडीए यदि आठवीं सीट के लिए आवश्यक अतिरिक्त वोट जुटा लेता है तो सीटों का बंटवारा अलग हो सकता है। इसलिए अभी इसे अंतिम परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता।

किसे राज्यसभा भेज सकती हैं पार्टियां

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा और सपा ने अभी इन 10 सीटों के लिए अपने आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और 6 अक्टूबर तक चलेगी। इसलिए किसी नेता का नाम अभी पक्का बताना जल्दबाजी होगी।

भाजपा के सामने आठ मौजूदा राज्यसभा सदस्यों के कार्यकाल से जुड़ी सीटें हैं। इनमें बृज लाल, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं। दिनेश शर्मा की सीट भी इसी चुनाव में भरी जाएगी, हालांकि वे 11 सितंबर को अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं।

इसलिए भाजपा के लिए मौजूदा सदस्यों में से किसी को दोबारा मौका देने और नए चेहरों को राज्यसभा भेजने—दोनों विकल्प खुले हैं। हरदीप सिंह पुरी और अरुण सिंह को दोबारा भेजे जाने की चर्चाएं हैं, लेकिन इसे भाजपा की घोषित सूची नहीं माना जा सकता।

सपा की ओर से मौजूदा राज्यसभा सदस्य और पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। सपा के पास दो सीटों का गणित होने के कारण एक बड़ा सवाल यह रहेगा कि पार्टी रामगोपाल यादव के अलावा और किस नये चेहरे राज्यसभा भेजती है। फिलहाल सपा की ओर से भी आधिकारिक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हुई है।

इन चुनावों में बसपा की स्थिति सबसे अलग है। यूपी विधानसभा में फिलहाल बसपा का कोई विधायक नहीं है और रामजी गौतम का राज्यसभा कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो रहा है। अपने दम पर 37 वोट जुटाने की स्थिति में नहीं होने के कारण मौजूदा गणित में बसपा के लिए अपनी राज्यसभा सीट बरकरार रखना कठिन है।

दसवीं सीट पर टिका रहेगा असली पेच

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू 10वीं सीट होगी। मौजूदा संख्या में भाजपा-एनडीए के सात उम्मीदवारों और सपा के दो उम्मीदवारों के लिए आवश्यक वोटों का गणित बन रहा है। इसके बाद बचने वाली सीट के लिए दोनों खेमों को अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में छोटे दलों, निर्दलीय विधायकों और संभावित क्रॉस वोटिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले होने वाला यह चुनाव भाजपा और सपा के लिए केवल राज्यसभा की सीटों का मामला नहीं रहेगा। दोनों दलों के लिए अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और सहयोगी दलों के समर्थन को कायम रखने की राजनीतिक परीक्षा भी होगी।

राज्यसभा सीटों के लिए घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी। 6 अक्टूबर को नामांकन की अंतिम तारीख है।
7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच, 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तारीख, 16 अक्टूबर को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान और इसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना होगी।

SP_Singh AURGURU Editor