असगर अली हत्याकांड- सीडीआर, मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी से खुलेगा राज
ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड की जांच में कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। रवि यादव के अधिवक्ता अवनीश कुमार वैश्य की आपत्ति के बाद कोर्ट ने सीडीआर, मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के निर्देश दिए हैं। इससे नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी अजय यादव, जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह और पत्रकार कामरान की घटना के पहले और बाद की गतिविधियों की पड़ताल होगी। तकनीकी साक्ष्यों के जरिए कॉल संपर्क, लोकेशन और घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों का मिलान किया जाएगा। तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर तस्वीर स्पष्ट होगी।
कोर्ट के आदेश से नगर निगम के अधिकारी अजय यादव, जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह और पत्रकार कामरान की मुश्किलें बढ़ने के संकेत, रवि यादव के अधिवक्ता की आपत्ति पर तकनीकी साक्ष्यों की जांच के निर्देश
आगरा। ट्रांसपोर्टर असगर अली हत्याकांड की जांच में अब तकनीकी साक्ष्य अहम भूमिका निभा सकते हैं। मामले में कोर्ट ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का यह आदेश रवि यादव के अधिवक्ता अवनीश कुमार वैश्य की ओर से उठाई गई आपत्ति के बाद सामने आया है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब घटना से पहले और बाद की गतिविधियों की तकनीकी स्तर पर पड़ताल की जाएगी। खासतौर पर नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी अजय यादव, जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह और पत्रकार कामरान से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जाएगी। हालांकि, इन साक्ष्यों की विस्तृत जांच और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही उनकी भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सीडीआर से खंगाली जाएगी कॉल की पूरी कड़ी
जांच में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों में से एक सीडीआर को माना जा रहा है। इसके जरिए संबंधित मोबाइल नंबरों से हुई कॉल, कॉल का समय और संपर्क की गतिविधियों का विश्लेषण किया जाएगा। घटना से पहले और उसके बाद किन लोगों से संपर्क हुआ, कितनी देर बातचीत हुई और घटनाक्रम के समय संबंधित लोगों के बीच किसी तरह का संपर्क था या नहीं, इन पहलुओं की जांच की जाएगी। तकनीकी रिपोर्ट से जांच एजेंसियों को घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।
मोबाइल लोकेशन से घटनाक्रम का होगा मिलान
कोर्ट के निर्देश में मोबाइल लोकेशन की जांच भी महत्वपूर्ण है। संबंधित लोगों के मोबाइल की लोकेशन को घटना के समय और घटनास्थल से जोड़कर देखा जाएगा। जांच में यह पता लगाने का प्रयास होगा कि घटना से पहले संबंधित मोबाइल किस क्षेत्र में सक्रिय थे और घटना के बाद उनकी लोकेशन कहां रही। यदि मोबाइल लोकेशन और जांच में सामने आए घटनाक्रम के बीच कोई महत्वपूर्ण समानता या अंतर मिलता है तो वह जांच की दिशा के लिए अहम हो सकता है।
सीसीटीवी फुटेज से आने-जाने वालों की गतिविधियों पर नजर
हत्याकांड की जांच में सीसीटीवी फुटेज भी महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। कोर्ट के आदेश के बाद घटना से जुड़े संभावित स्थानों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के निर्देश दिए गए हैं। फुटेज में घटना से पहले और बाद में आने-जाने वाले लोगों, वाहनों और संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल की जाएगी। इससे घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों और वाहनों की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।
रवि यादव के अधिवक्ता की आपत्ति के बाद आया आदेश
बताया गया है कि मामले में रवि यादव की ओर से अधिवक्ता अवनीश कुमार वैश्य ने आपत्ति उठाई थी। इसके बाद कोर्ट ने तकनीकी साक्ष्यों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। इस आदेश को हत्याकांड की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब जांच केवल बयान और पारंपरिक साक्ष्यों तक सीमित न रहकर डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भी आगे बढ़ेगी।
तीनों की भूमिका पर तकनीकी रिपोर्ट डालेगी रोशनी
मामले में नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी अजय यादव, जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह और पत्रकार कामरान की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कोर्ट के निर्देश के बाद इनसे जुड़े सीडीआर, मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज की जांच से यह पता लगाने का प्रयास होगा कि घटना के समय और उसके आसपास उनकी गतिविधियां क्या थीं। हालांकि, तकनीकी साक्ष्यों की जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने से पहले किसी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जांच में सामने आने वाले डिजिटल साक्ष्य ही यह स्पष्ट करेंगे कि संबंधित लोगों की गतिविधियां घटनाक्रम से किस तरह जुड़ी थीं या नहीं।
जांच की दिशा बदल सकती है तकनीकी रिपोर्ट
असगर अली हत्याकांड में कोर्ट का यह आदेश जांच के लिए नया मोड़ साबित हो सकता है। सीडीआर, मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी जैसे साक्ष्य घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अब जांच का फोकस इस बात पर रहेगा कि घटना से पहले कौन किसके संपर्क में था, संबंधित लोगों की लोकेशन क्या थी और घटनास्थल के आसपास उनकी गतिविधियां किस प्रकार की थीं। तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद हत्याकांड से जुड़ी कई महत्वपूर्ण कड़ियों पर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।