असीम मुनीर, शहबाज शरीफ सिंधु जल संधि पर धमकी से तनाव फिर बढ़ा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को भारत को एक बार फिर चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान में पानी का प्रवाह रोकने की कोई भी कोशिश सिंधु जल संधि का उल्लंघन होगी और इसके लिए "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा।
इस्लामाबाद। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था। भारत ने उसके बाद से साफ शब्दों में कहा है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद पर सौ फीसदी लगाम नहीं लगाता, तो भारत सिंधु जल संधि को फिर से बहाल नहीं करेगा। इसके बाद से पाकिस्तान भड़का हुआ है। इस दौरान दोनों देशों के बीच एक छोटा सा युद्ध भी हो चुका है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए थे, फिर भी पाकिस्तान लगातार भारत को हमले की धमकियां दे रहा है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से लेकर रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ... हर किसी ने भारत को युद्ध की चेतावनी दी है और कहा है कि "पाकिस्तान का एक बूंद पानी भी छीना नहीं जा सकता।" पाकिस्तानी नेताओं के बयान से फिर से क्षेत्रीय तनाव बढ़ चुका है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई पाकिस्तान, भारत से युद्ध शुरू करेगा? या सिर्फ शहबाज शरीफ की सरकार घरेलू फायदे के लिए धमकियां दे रही है? असीम मुनीर ने अमेरिका में कहा है कि वो भारत के सिंधु नदी पर बांध बनाने का इंतजार करेंगे और बांध बनने के बाद 10 मिसाइल हमलों में उसे तबाह कर देंगे।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को भारत को एक बार फिर चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान में पानी का प्रवाह रोकने की कोई भी कोशिश सिंधु जल संधि का उल्लंघन होगी और इसके लिए "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, जियो न्यूज ने शरीफ के हवाले से कहा, "दुश्मन पाकिस्तान से पानी की एक बूंद भी नहीं छीन सकता। अगर आपने ऐसा करने की कोशिश की, तो हम आपको ऐसा सबक सिखाएंगे जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे।" उन्होंने पानी को पाकिस्तान की "जीवन रेखा" बताया और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत देश के अधिकारों से कोई समझौता नहीं करने की कसम खाई।
सिंधु जल संधि को पढ़ने पर पता चलता है कि इस समझौते का हवाला देकर पाकिस्तान, भारत पर हमला करने की शक्ति नहीं रखता है। सिंधु जल संबंधित विवाद से निपटने के लिए तीन स्तर के मैकेनिज्म बनाए गये हैं। 1- दोनों देशों के सिंधु कमिश्नरों के बीच बातचीत, 2- विश्व बैंक की तरफ से न्यूट्रल एक्सपर्ट की नियुक्ति और 3- इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन। विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा खुद कह चुके हैं कि उनका रोल सिर्फ फैसिलिटेटर का है और विश्व बैंक का काम समस्या को सुलझाना नहीं है। जबकि भारत ने हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन की कार्यवाही को गैर कानूनी बताकर उसका बहिष्कार किया है।