चिंतन शिविर में आत्मबोध का जागरण, आर्य समाज वैचारिक क्रांति और राष्ट्र निर्माण का आंदोलन
आगरा। आर्य समाज की ओर से पहली बार आयोजित एक दिवसीय चिंतन शिविर रविवार को बल्केश्वर स्थित आर्य समाज मंदिर परिसर में वैदिक यज्ञ, मंत्रोच्चार और भजन वंदना के साथ शुरू हुआ। आर्य समाज—एक जीवन दर्शन, वैचारिक क्रांति और राष्ट्र निर्माण का आंदोलन विषय को केंद्र में रखते हुए इस चिंतन शिविर में दो सत्रों के माध्यम से आर्य विचारधारा, सामाजिक उत्तरदायित्व, संगठनात्मक सुधार और वर्तमान समय की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
शिविर में आगरा मंडल से चयनित 120 आर्यजनों ने भाग लिया। प्रमुख वक्ता एटा गुरुकुल के आचार्य डॉ. वगीष ने कहा, आर्य समाज केवल एक धार्मिक संस्था नहीं बल्कि वेद आधारित तर्कशील विचारधारा का नाम है। यह मूर्ति पूजा, अंधविश्वास, जातिवाद और पाखंड के विरुद्ध सतत संघर्ष का प्रतीक है। महर्षि दयानंद ने नारी शिक्षा और दलित उत्थान के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी समाज में प्रेरणा स्रोत है।
डॉ. वगीष ने कहा कि महर्षि दयानंद ने वेदों की ओर लौटने का जो संदेश दिया, वह आज के वैज्ञानिक युग में भी पूरी तरह प्रासंगिक है। आर्य समाज धार्मिक सुधार के साथ-साथ सामाजिक, शैक्षिक और नैतिक क्रांति का वाहक रहा है।
कार्यक्रम संयोजक सीए मनोज खुराना ने कहा, आज के पाखंडग्रस्त समाज में आर्य समाज का वैदिक दृष्टिकोण नई चेतना का संचार कर रहा है। संगठनात्मक रूप से मजबूत आर्य समाज ही देश को एक सशक्त और आत्मनिर्भर दिशा दे सकता है। शिविर के दौरान आर्य समाज की कार्यपद्धति, मूल सिद्धांतों और सामाजिक दायित्वों पर खुलकर संवाद हुआ।
द्वितीय सत्र के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे आर्य समाज की गतिविधियों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे और वेद प्रचार तथा सामाजिक जागरूकता के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख आर्यजनों में उमेश कुलश्रेष्ठ, डॉ. वीरेंद्र खंडेलवाल, अरविंद मेहता, नवीन शास्त्री, आर्य अश्वनी, अवनींद्र गुप्ता, सुभाष अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल, प्रदीप कुमार, अर्जुन देव महाजन, यतीन्द्र आर्य, अनुज आर्य, विश्वेन्द्र शास्त्री, वीरेंद्र कनवर, संगीता खुराना, प्रेमा कनवर, कांता बंसल, राजीव दीक्षित, विजय अग्रवाल आदि शामिल थे।