आयुर्वेद-होम्योपैथी अनुसंधान को मिला सरकार का संबल: नवीन जैन के सवाल पर आयुष मंत्रालय का जवाब
नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद नवीन जैन द्वारा संसद में पूछे गए सवाल पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि बीते तीन वर्षों में आयुर्वेद और होम्योपैथी अनुसंधान को मजबूती देने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। आयुष मंत्रालय की ओर से जवाब देते हुए राज्यमंत्री प्रताप राव जाधव ने बताया कि केंद्र सरकार के तहत कार्यरत केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के माध्यम से देशभर में अनुसंधान गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
मंत्री के अनुसार, सीसीआरएच वर्तमान में 27 अनुसंधान संस्थानों और 6 होम्योपैथिक अस्पतालों के माध्यम से अपनी सेवाएं दे रहा है। इसके अलावा वर्ष 2022-23 में गोवा में एक नई वैज्ञानिक अनुसंधान इकाई स्थापित की गई है, जिस पर 7.32 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। वहीं, वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 85.29 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार को विभिन्न राज्यों से नए अनुसंधान केंद्रों की स्थापना के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता अनुसंधान के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में आयुर्वेद और होम्योपैथिक सेवाओं की सहज उपलब्धता भी है।
शैक्षणिक और संस्थागत प्रयास
राज्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) की स्थापना 2021 में की गई थी, जो देशभर में होम्योपैथिक शिक्षा और अनुसंधान के दिशा-निर्देश तय करता है। साथ ही, राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान कोलकाता के माध्यम से स्नातकोत्तर स्तर की चिकित्सा शिक्षा और शोध को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जन-जागरूकता अभियान
सरकार द्वारा आयुष चिकित्सा पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाने हेतु स्वास्थ्य मेले, निःशुल्क शिविरों और प्रदर्शनियों के माध्यम से लोगों को जानकारी दी जा रही है, जिससे आयुर्वेद और होम्योपैथी की स्वीकार्यता और उपयोगिता में वृद्धि हो सके।