23 महीने बाद जेल से बाहर आ गए आजम खाः सियासी सवाल- सपा में रहेंगे या बसपा का दामन थामेंगे?

लखनऊ। 23 महीने बाद सीतापुर जेल से बाहर आए सपा के कद्दावर नेता आज़म खां अब सीधे यूपी की राजनीति के केंद्र में हैं। कानूनी अड़चनें पार करने और 72 मामलों में जमानत हासिल करने के बाद शनिवार को दोपहर 12 बजे उनकी सीतापुर जेल से रिहाई हो गई। जेल से बाहर आते ही सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनका अगला कदम क्या होगा। क्या वे नाराज़गी के बावजूद सपा में बने रहेंगे, या फिर बसपा की ओर बढ़ते संकेतों को ठोस रूप देंगे?

Sep 23, 2025 - 12:54
 0
23 महीने बाद जेल से बाहर आ गए आजम खाः सियासी सवाल- सपा में रहेंगे या बसपा का दामन थामेंगे?

जेल से रिहाई के वक्त सैफई परिवार से कोई नहीं था मौजूद, मुरादाबाद की सांसद रुचिवीरा जरूर पहुंचीं

कानूनी रास्ता साफ, रिहाई में देरी

रामपुर की अदालत से ज़मीन मामले सहित कई मुकदमों में राहत मिलने के बाद उनकी रिहाई तय थी। सुबह 7 बजे उन्हें जेल से निकलना था, लेकिन दो जुर्माने (3,000 और 5,000 रुपये) न भरने से रिहाई आदेश फंस गया। बाद में रामपुर कोर्ट खुलते ही जुर्माना अदा किया गया और सीतापुर जेल को रिलीज़ ऑर्डर भेजा गया। इसी प्रक्रिया के बाद आज़म खां की दोपहर 12 बजे उनकी रिहाई संभव हो सकी।

सैफई परिवार से कोई नहीं था मौजूद

आजम खां की रिहाई सुबह सात बजे तय मानकर उनके समर्थक हजारों की संख्या में सीतापुर जेल के बाहर पहुंच गये थे। समर्थकों को यह जानकारी निराशा हुई कि दो जुर्मानों की राशि अदा होने के बाद ही उनकी रिहाई होगी। जेल पर सैफई परिवार से कोई नहीं पहुंचा था। मुरादाबाद की सपा सांसद रुचिवीरा अवश्य सीतापुर जेल के बाहर मौजूद रहीं। जेल से रिहा होते ही आजम खां गाड़ी में बैठकर रामपुर के लिए रवाना हो गये।

अखिलेश की प्रतिक्रिया- आजम खां के जेल से बाहर आने पर हम खुश

आजम खां के जेल से बाहर आने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनका जेल से बाहर आना सपा के लिए खुशी की बात है। अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खां पर झूठे मुकदमे लगाए गए हैं। हमारी सरकार बनने के बाद ये सारे मुकदमे वापस ले लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आजम खां समाजवादी पार्टी के संस्थापकों में से एक हैं। पार्टी में उनका जो योगदान है, उसे भुलाया नहीं जा सकता।

बसपा में जाने की अटकलें क्यों तेज़?

पिछले कई दिन से ये चर्चाएं तेज हैं कि जेल से बाहर आने के बाद आजम खां नौ अक्तूबर को लखनऊ में होने वाली बसपा की रैली में बसपा का दामन थाम लेंगे। इन चर्चाओं को तब और बल मिला था जब आजम खां की पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा की मायावती से मुलाक़ात की बातें सामने आईं। बसपा विधायक उमा शंकर सिंह तो सार्वजनिक बयान दे चुके हैं कि अगर आज़म खां बसपा में आते हैं तो उनका स्वागत है। यहां गौर करने की बात यह है कि मायावती की अनुमति के बिना बसपा में ऐसा बयान आना लगभग नामुमकिन माना जाता है। 9 अक्तूबर को लखनऊ में बसपा की बड़ी रैली है और राजनीतिक हलकों में यह जानने की बेकरारी है कि क्या यह मंच आज़म के नए अध्याय की शुरुआत बन सकता है।

सपा में बने रहने की संभावना

हालांकि, आज़म खां सपा के संस्थापकों में से एक रहे हैं। इसी आधार पर सपा के नेता बराबर यह कह रहे हैं कि आजम खां सपा में ही रहेंगे, मगर अखिलेश यादव से उनकी नाराज़गी छुपी नहीं है। लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर सीट पर आजम खां की राय को अनदेखा किए जाने से सपा मुखिया और आजम खां के संबंध और बिगड़े।

स्वतंत्र भूमिका की गुंजाइश

आजम खां का मुस्लिमों के बीच आधार इतना मजबूत है कि वे चाहें तो किसी गठबंधन में किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। मगर लंबी जेलयात्रा, कानूनी बोझ और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियां उनके इस विकल्प को सीमित करती हैं।

असर किस पर पड़ेगा?

सपा के लिहाज से अगर आज़म चले जाते हैं तो मुस्लिम बहुल इलाक़ों में सपा को बड़ा झटका लग सकता है। बसपा के लिए आज़म का जुड़ाव बसपा को गैर-दलित खासकर मुस्लिम मतदाताओं तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण साधन होगा।

आज़म खां की रिहाई के साथ ही उनकी सियासत का नया पन्ना खुल चुका है। एक ओर सपा से लंबा जुड़ाव और संस्थापक की पहचान है, दूसरी ओर बसपा में शामिल होने की अटकलें और मौक़ा मौजूद है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि आज़म खां की नाराज़गी दूर कर सपा उन्हें अपने साथ जोड़े रखेगी या फिर वे बसपा में नया गेम शुरू करेंगे।

SP_Singh AURGURU Editor