बंकिम बाबू के परपोते सजल ने कहा- नेहरू ने की उनकी उपेक्षा
राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार वाले संसद में हो रही बहस से बहुत खुश हैं। उन्हें इस बात पर गर्व है कि अब राष्ट्रगीत को इस तरह से सम्मान मिल रहा है। अबतक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की हुई उपेक्षा से उन्हें काफी शिकायत है।
नई दिल्ली। वंदे मातरम के 150 वर्ष के मौके पर संसद में विशेष बहस हो रही है। इस दौरान राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिजन भी खुलकर अपनी भावनाएं जाहिर कर रहे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपने राष्ट्रगीत से समूचे भारत को जगा देने वाले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार वाले आज उनकी घनघोर उपेक्षा पर खुलकर अपनी बातें रख रहे हैं। उनकी शिकायत है कि वे जिसके हकदार थे, वह सम्मान उन्हें कभी नहीं दिया गया। लेकिन, अब जिस तरह से वंदे मातरम् पर चर्चा हो रही है, उससे वे बहुत ही खुश हैं।
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय स्वाधीनता के महान नायक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परपोते सजल ने अपने परदादा के प्रति कांग्रेस, पश्चिम बंगाल सरकार और जवाहर लाल नेहरू की उदासीनता उजागर की है। उनकी शिकायत है कि उनके परदादा की विरासत के साथ अन्याय किया गया। उन्होंने कहा, 'आज जो हो रहा है, उसपर मुझे गर्व है। बंकिम बाबू को वह सम्मान कभी नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। बच्चे आज उनके बारे में नहीं जानते हैं, और इसके लिए हम जिम्मेदार हैं। लोगों को नहीं पता है कि वंदे मातरम् असल में क्या है।'
परिजनों का कहना है कि बंकिम चंद्र चटर्जी की उपेक्षा नेहरू के साथ शुरू हुई। परिवार का कहना है, 'केंद्र सरकार अब कई सकारात्मक कदम उठा रही है, लेकिन बंगाल सरकार का क्या? उन्होंने कुछ नहीं किया है। चट्टोपाध्याय को कहीं भी कोई विशेष पहचान नहीं मिली है। इस गीत का जन्म बंगाल में हुआ, फिर भी बंगाल ने उनको उनका हक नहीं दिया। अब जो कुछ हो रहा है, उससे मुझे खुशी है, लेकिन हम बंगाल में रहते हैं और यहां कुछ भी नहीं किया गया है।'
सजल ने अपने परदादा की विरासत को थोड़ा विस्तार देते हुए बताया, 'नैहाटी में बंकिम बाबू के घर को टूरिज्म साइट घोषित नहीं किया गया है। क्या यह आधिकारिक तौर पर कहीं भी शामिल है? उनके नाम पर समर्पित कोई भी यूनिवर्सिटी नहीं है। हर जगह रबींद्रनाथ टैगोर या विद्यासागर के नाम पर यूनिवर्सिटी है या रबींद्र भवन है, लेकिन चट्टोपाध्याय के नाम पर कोई यूनिवर्सिटी नहीं है। क्यों? उनकी उपेक्षा की गई है। पीएम (मोदी) ने आज संसद में जो कहा है, उसके लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूं। केंद्र सरकार लगातार हमसे संपर्क में है, लेकिन राज्य सरकार ने कभी भी हमारे परिवार से संपर्क नहीं किया है।'
लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम् पर बहस की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम की आवाज बन गया। ब्रिटिश काल में भारत को कमजोर, आलसी और हर तरह से बेकार दिखाना फैशन बन गया था। हमारे देश के लोगों की ओर से भी वैसी ही भाषा में बातें की गईं। बंकिम बाबू ने देश की चेतना को झकझोरने और जागृति लाने के लिए यह गीत लिखा था। ऐसे ही समय में बंकिम चंद्र ने देश को हीन भावना से बाहर निकालने और भारत के शक्तिशाली रूप को सामने लाने के लिए ये पंक्तियां लिखीं। यह गीत हमारे हजारों वर्षों के इतिहास और विरासत को फिर से जीवित करने के लिए था।'
सजल चाहते हैं कि वंदे मातरम् के सभी छह छंदों का उपयोग होना चाहिए। उनके अनुसार 'इसे सीमित करने के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। मोहम्मद अली जिन्ना ने नेहरू से कहा और नेहरू ने मान लिया। पूरा गीत गाया जाना चाहिए। वंदे मातरम् को मना करने वाला हिंदू नहीं है।'